Mahakaushal Times

भोपाल में आवारा कुत्तों का आतंक: स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल


भोपाल  भोपाल शहर में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक शहर में हर दिन औसतन 81 लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं, जिससे आम लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम द्वारा पिछले पांच वर्षों में डॉग्स की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर लगभग 8.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं दिख रहा, बल्कि घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्तों की मौजूदगी बताई जा रही है, लेकिन इसके मुकाबले नगर निगम के पास एक भी स्थायी डॉग शेल्टर नहीं है। मौजूदा समय में केवल तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर संचालित हो रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता मात्र 600 कुत्तों की है। इन केंद्रों में रोजाना केवल 20 से 25 कुत्तों की ही नसबंदी और टीकाकरण किया जा रहा है, जो समस्या के मुकाबले बेहद कम है।

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहर से हर दिन लगभग 15 शिकायतें डॉग बाइट से जुड़ी आ रही हैं। कई गंभीर मामलों में घायल बच्चे और बुजुर्ग जेपी और हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां आवारा कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं। अशोका गार्डन, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मीनाल रेसीडेंसी, छोला, बैरागढ़, लालघाटी, रेलवे स्टेशन और न्यू मार्केट जैसे क्षेत्रों में रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। फुटपाथों पर कुत्तों के झुंडों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन भोपाल में इन आदेशों का पालन अभी भी चुनौती बना हुआ है। स्थायी शेल्टर और प्रभावी प्रबंधन की कमी के कारण समस्या और गंभीर होती जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो जाता है, जिससे डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ जाती हैं। शरीर में पसीना निकालने की प्राकृतिक व्यवस्था न होने के कारण कुत्तों में चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ जाता है, जिससे वे आक्रामक हो जाते हैं। यही कारण है कि अप्रैल से जून के बीच हमलों में तेजी देखी जाती है।

राज्य और देश के आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है। केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे शहरों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में लाखों की संख्या में आवारा कुत्ते मौजूद हैं और हर साल डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

इंदौर में भी हालात चिंताजनक हैं, जहां एक महीने में हजारों डॉग बाइट के मामले सामने आ चुके हैं। वहीं पूरे राज्य में रेबीज संक्रमण से मौतों के मामले भी दर्ज किए गए हैं, जिससे यह समस्या और अधिक खतरनाक बन जाती है।

कुल मिलाकर भोपाल में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमी और शहरी पशु प्रबंधन की कमजोर प्रणाली को उजागर करती हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार न होना अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर