भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में कथित अनियमितताओं का मामला अब निर्णायक मोड़ ले चुका है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने गुरुवार देर रात कुलगुरु प्रोफेसर राजीव त्रिपाठी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। त्रिपाठी ने इसे ‘व्यक्तिगत कारणों’ से जोड़ा, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, छात्र संगठनों के आक्रामक विरोध और नैक (NAAC) की सेल्फ-स्टडी रिपोर्ट (SSR) में फर्जी आंकड़े दिखाकर A++ ग्रेड हासिल करने के गंभीर आरोपों ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया।
राज्यपाल के आदेश के तुरंत बाद, विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर एससी चौबे को अंतरिम कुलगुरु का दायित्व सौंप दिया गया। चौबे ने पदभार ग्रहण करते हुए कहा, “RGPV की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने के लिए पारदर्शी जांच, सुधारात्मक उपाय और शैक्षणिक गुणवत्ता पर फोकस किया जाएगा। सभी हितधारकों का सहयोग अपेक्षित है।”
आरोपों की आग में घिरा RGPV: छात्र संगठनों का घेराव
विवाद की जड़ है NAAC मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और अन्य छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि SSR रिपोर्ट में छात्र संख्या, रिसर्च पेपर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे आंकड़ों में हेराफेरी की गई, जिससे विश्वविद्यालय को अप्रत्याशित A++ ग्रेड मिला। विरोध प्रदर्शन इतने उग्र हो गए कि छात्रों ने कैंपस घेर लिया और कुलगुरु के इस्तीफे की मांग की। ABVP ने दावा किया, “यह सिर्फ ग्रेडिंग का खेल नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था का अपमान है।”
मंत्री परमार की सख्ती: निष्पक्ष जांच का ऐलान
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मामले को ‘शिक्षा क्षेत्र में काला धब्बा’ बताते हुए केंद्रीय जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “SSR में गलतियां साबित हुईं तो दोषियों पर कोई रहम नहीं। NAAC प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता से संचालित करने के लिए दिशानिर्देश जारी होंगे। मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना हमारी प्राथमिकता है।”
यह घटना RGPV के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। प्रो. चौबे के नेतृत्व में अब NAAC रिपोर्ट की समीक्षा और छात्र शिकायतों का समाधान प्राथमिकता बनेगा। छात्र संगठन सतर्क हैं और कह रहे हैं, “नया अध्याय तभी बनेगा जब दोषी सजा पाएं।” राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने पर कार्रवाई निश्चित है।