MP High Court : जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर शहर में ओमती और मोती नालों के दूषित पानी से सब्जियां उगाने की खतरनाक प्रथा पर सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
चीफ जस्टिस संजीव सच्चदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने एक लॉ छात्र के पत्र को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए कहा कि यह जनता की सेहत से खिलवाड़ है और पर्यावरण संरक्षण के प्रावधानों का खुला उल्लंघन। कोर्ट ने वरिष्ठ वकील रामेश्वर सिंह ठाकुर को कोर्ट मित्र नियुक्त किया और 26 नवंबर को अगली सुनवाई तय की।
हाइपरटेंशन, त्वचा जलन, मुंहासे, गैस, सूजन, सिरदर्द, एलर्जी (MP High Court)
याचिका में बताया गया कि कछपुरा, विजय नगर, कचनारी, गोहलपुर, बेलखाड़ू और बघौड़ा जैसे इलाकों में ओमती और मोती नालों का गंदा पानी, जो सीवेज, डिटर्जेंट और घरेलू कचरे से भरा होता है, सब्जी खेती के लिए इस्तेमाल हो रहा है। कभी ओमवती नदी के नाम से जाना जाने वाला ओमती नाला अब शहर के बीचों-बीच बहता है और इसमें सेप्टिक टैंक तथा बाथरूम का गंदा पानी बहता है। इसी तरह मोती नाला भी संक्रमित है। विशेषज्ञों के अनुसार, नाले के पानी में घुलित डिटर्जेंट के सोडियम कार्बोनेट, सोडियम लॉरेथ सल्फेट और एल्काइल बेंजीन सल्फोनेट जैसे रसायन हाइपरटेंशन, त्वचा जलन, मुंहासे, गैस, सूजन, सिरदर्द, एलर्जी और यहां तक कि कैंसर का खतरा पैदा करते हैं।
साफ पानी की कमी के कारण करते हैं (MP High Court)
कोर्ट को अवगत कराया गया कि ये जहरीले तत्व सब्जियों में अवशोषित होकर खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहे हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए घातक है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि किसान इस पानी का इस्तेमाल इसलिए करते हैं क्योंकि साफ पानी की कमी है, लेकिन संबंधित विभाग – नगर निगम, जल संसाधन और प्रदूषण नियंत्रण – एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर कार्रवाई से बच रहे हैं। लंबे समय से उठ रही मांगों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
किडनी और लीवर को नुकसान (MP High Court)
बेंच ने टिप्पणी की कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण रोकथाम कानून का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। कोर्ट ने कलेक्टर से नालों की सफाई, वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था और प्रभावित सब्जी उत्पादकों को जागरूक करने का विवरण मांगा है। विशेषज्ञों की चेतावनियों का हवाला देते हुए कहा गया कि डिटर्जेंट युक्त पानी से उगाई गई सब्जियां लंबे समय में किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।