आमतौर पर सड़क पर एंबुलेंस का सायरन सुनते ही लोग तुरंत रास्ता खाली कर देते हैं, क्योंकि उसमें किसी गंभीर मरीज की जिंदगी दांव पर लगी होती है। लेकिन सीहोर में हालात उलट नजर आ रहे हैं। यहां जीवन बचाने वाली एंबुलेंस खुद सड़क पर लाचार खड़ी दिखाई दे रही हैं। वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में लोग एंबुलेंस को धक्का लगाते नजर आ रहे हैं, जिसने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किसी गंभीर मरीज, गर्भवती महिला या घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस बीच रास्ते बंद हो जाए, तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती है। समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीज की जान तक जा सकती है। लोगों ने सवाल उठाया है कि जब आपातकालीन सेवा देने वाले वाहन ही सुरक्षित और सक्षम नहीं हैं, तो मरीजों की जिंदगी की जिम्मेदारी कौन लेगा।
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि एंबुलेंस के रखरखाव और मरम्मत के नाम पर हर साल बजट खर्च होता है, फिर भी वाहन जर्जर हालत में क्यों हैं। कई लोगों ने इस पूरे मामले में बजट के दुरुपयोग और लापरवाही की जांच की मांग भी उठाई है।
हालांकि जिला अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज नहीं किया, लेकिन दावा किया है कि सभी एंबुलेंस का समय-समय पर मेंटेनेंस कराया जाता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि तकनीकी खराबियां कभी-कभी अचानक सामने आ जाती हैं, जिन्हें तुरंत ठीक करने का प्रयास किया जाता है।
इसके बावजूद सड़क पर धक्का खाती एंबुलेंस की तस्वीरें स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई बयां कर रही हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो किसी दिन यह लापरवाही बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।