पर्सनल लोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की सिक्योरिटी या संपत्ति गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। यह पूरी तरह आपकी आय, क्रेडिट स्कोर और रीपेमेंट क्षमता पर आधारित होता है। आवेदन प्रक्रिया भी काफी सरल होती है और कई बार कुछ ही घंटों में लोन अप्रूव हो जाता है।
योग्यता यानी एलिजिबिलिटी की बात करें तो इसके लिए आवेदक का वेतनभोगी या स्व-नियोजित होना जरूरी है। आमतौर पर 21 से 60 वर्ष की आयु सीमा में आने वाले व्यक्ति इस लोन के लिए पात्र होते हैं। साथ ही अच्छा क्रेडिट स्कोर (आमतौर पर 700 या उससे अधिक) होने पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। बैंक आपकी मासिक आय और नौकरी की स्थिरता को भी ध्यान में रखते हैं।
ब्याज दर (Interest Rate) की बात करें तो यह अलग-अलग बैंकों और NBFCs में भिन्न हो सकती है। आमतौर पर पर्सनल लोन पर ब्याज दर 10% से लेकर 24% सालाना तक हो सकती है। यह दर आपके क्रेडिट स्कोर, आय और बैंक पॉलिसी पर निर्भर करती है। बेहतर क्रेडिट स्कोर होने पर आपको कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है।
पर्सनल लोन की एक खासियत यह भी है कि इसकी रीपेमेंट अवधि 1 साल से लेकर 5-7 साल तक हो सकती है, जिससे ईएमआई को अपने बजट के अनुसार मैनेज करना आसान हो जाता है।
हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पर्सनल लोन केवल जरूरी परिस्थितियों में ही लिया जाए, क्योंकि इसकी ब्याज दर अन्य लोन की तुलना में थोड़ी अधिक होती है। समय पर ईएमआई न चुकाने पर क्रेडिट स्कोर पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर पर्सनल लोन एक उपयोगी वित्तीय साधन है, जो सही योजना और समझदारी के साथ लिया जाए तो आर्थिक जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकता है।