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MP News : विवादित बयान पर IAS संतोष वर्मा को मिला कारण बताओ नोटिस

MP News : विवादित बयान पर IAS संतोष वर्मा को मिला कारण बताओ नोटिस

MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष वर्मा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJAKS) के प्रांतीय अधिवेशन में दिए उनके विवादास्पद बयान पर सामान्य प्रशासन विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में वर्मा को 7 दिनों के अंदर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया गया है, वरना एकतरफा कार्रवाई होगी। एक तरफ ब्राह्मण समाज लगातार विरोध जता रहा है, वहीं विभाग ने इसे अनुशासनहीनता और सामाजिक समरसता को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।

नोटिस में क्या लिखा गया? (MP News)

विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी प्रदीप कुमार शर्मा के हस्ताक्षर वाले नोटिस में कहा “23 नवंबर 2025 को AJAKS अधिवेशन में दिए गए बयान में ‘एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं कर दे या उससे संबंध नहीं बना ले’ जैसी टिप्पणी सामाजिक समरसता को ठेस पहुंचाने और वैमनस्यता फैलाने की कोशिश है। यह अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियम, 1968 के नियम 3(1), 3(2)(बी)(i)(ii) का उल्लंघन है।”

नोटिस में आगे कहा गया कि यह बयान IAS अधिकारियों से अपेक्षित गरिमा और आचरण के विरुद्ध है, जो अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। इसलिए, अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1969 के तहत कार्रवाई क्यों न हो, इसका कारण बताएं। जवाब न आने पर एकतरफा आगे बढ़ा दिया जाएगा।

विवाद का मूल बिंदु (MP News)

वर्मा ने अपने 27 मिनट के भाषण के एक हिस्से में कहा था, “आरक्षण तब तक जारी रहे जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी को मेरे बेटे को दान न कर दे या उसके साथ संबंध न बना ले।” वीडियो वायरल होते ही ब्राह्मण समाज ने इसे “बेटियों का अपमान” बताते हुए राज्यव्यापी विरोध शुरू कर दिया। ऑल इंडिया ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा, “यह IAS अधिकारी का कर्तव्यभ्रष्टाचार है। FIR हो, गिरफ्तारी हो, वरना आंदोलन करेंगे।” हिंदू उत्सव समिति के चंद्रशेखर तिवारी और मंत्रालय सेवा अधिकारी संघ के सुधीर नायक ने भी IAS कंडक्ट रूल्स के तहत कार्रवाई की मांग की।

वर्मा की सफाई (MP News)

वर्मा ने लल्लूराम डॉट कॉम को दिए इंटरव्यू में सफाई दी कि बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने कहा, “मैंने ‘दान’ नहीं, ‘कन्यादान’ कहा था। मेरा उद्देश्य जातिगत एकता पर जोर देना था। मेरी बेटी खुद दूसरे समाज में ब्याही है। ब्राह्मण समाज को ठेस पहुंची तो माफी मांगता हूं। असली AJAKS और नकली गुटों की लड़ाई में यह साजिश रची गई।” वर्मा ने वादा किया कि जल्द ही वायरल करने वालों को एक्सपोज करेंगे।

पूर्व IAS का कटाक्ष (MP News)

सपाक्स (SC-ST-PWD & OBC Association) के राष्ट्रीय संयोजक और रिटायर्ड IAS डॉ. हीरालाल त्रिवेदी ने बयान को “घटिया, निर्दिष्ट और निंदनीय” बताया। उन्होंने कहा, “ब्राह्मण बेटी को दान करने या संबंध बनाने की बात कही गई। इतना नीच बयान नहीं हो सकता। अपनी बेटी और दूसरों की में फर्क करने वाला व्यक्ति सामाजिक पद पर फिट नहीं। AJAKS-सपाक्स-OBC सबको बहिष्कार करना चाहिए। FIR हो, गिरफ्तारी हो। सरकार कार्रवाई करे।”

वर्मा (2011 बैच) पहले भी विवादों में रहे हैं। 2021 में फर्जी कोर्ट ऑर्डर से प्रमोशन लेने के आरोप में जेल गए थे। ब्राह्मण समाज ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। नोटिस के जवाब का इंतजार है, लेकिन विभागीय जांच से निलंबन की आशंका बढ़ गई है। यह मामला आरक्षण और जातिगत राजनीति को फिर गरमा सकता है।

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