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इंदौर में पानी संकट चरम पर: चेतावनी के बावजूद लोग पी रहे हैं हैंडपंप का पानी


मध्य प्रदेश । Indore इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है, जहां पानी की कमी ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान होता नजर नहीं आ रहा।

शहर के पालदा चौराहे पर रविवार को वार्ड 75 और वार्ड 64 के लोगों ने मिलकर घंटों तक चक्काजाम किया। करीब 3 से 4 घंटे तक लोग तेज धूप में पानी की मांग को लेकर बैठे रहे। हाथों में तख्तियां और बोतलें लिए लोग प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग करते रहे, लेकिन उनकी परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ती दिखीं।

प्रदर्शन के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिससे सिटी बसों से लेकर ट्रैवल्स वाहन तक फंस गए। बाद में प्रशासनिक आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया, लेकिन लोगों की नाराजगी जस की तस बनी रही।

सबसे चिंताजनक तस्वीर पालदा चौराहे के पास उस हैंडपंप की सामने आई, जिस पर लाल रंग से स्पष्ट लिखा है—“पानी पीने योग्य नहीं है।” इसके बावजूद स्थानीय लोग मजबूरी में उसी हैंडपंप से पानी भरते और उपयोग करते नजर आए। लोगों का कहना है कि जब आसपास कोई और विकल्प नहीं है, तो उन्हें यही पानी पीना पड़ रहा है, चाहे उसे छानकर या उबालकर ही क्यों न इस्तेमाल करना पड़े।

स्थानीय निवासी रुपेंद्र का कहना है कि क्षेत्र में पानी की भारी कमी है और उन्हें मजबूरी में लगभग 600 मीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। उनका कहना है कि चेतावनी के बावजूद उन्हें यही पानी लेना पड़ता है क्योंकि कोई दूसरा स्रोत उपलब्ध नहीं है।

वहीं एक छात्रा, जो बाहर से आकर Indore में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है, उसने बताया कि पिछले डेढ़ महीने से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हॉस्टल और रूम में रहने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है क्योंकि न तो पर्याप्त सप्लाई है और न ही बोरिंग काम कर रही है। नर्मदा जल आपूर्ति भी नियमित नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें मजबूरी में हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है।

इलाके के एक अन्य निवासी शैलेंद्र ने बताया कि उन्हें रोजाना करीब 1 किलोमीटर दूर पानी टंकी तक जाना पड़ता है। कई बार टैंकर भी उपलब्ध नहीं होते, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है। लोग ड्रम और केन में पानी भरकर किसी तरह दिन निकाल रहे हैं।

जल संकट की यह स्थिति सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी, पढ़ाई और कामकाज को भी प्रभावित कर रही है। कई इलाकों में लोग प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।

हालांकि स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अगर जल्द ही स्थायी व्यवस्था नहीं बनी, तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है।

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