निरीक्षण के दौरान महापौर ने फिल्टर प्लांट में पहुंचकर एक-एक प्रक्रिया को करीब से देखा। उन्होंने यह समझा कि बड़े तालाब से आने वाला कच्चा पानी किस तरह विभिन्न चरणों से गुजरकर पीने योग्य बनाया जाता है। प्लांट में मौजूद तकनीकी स्टाफ ने पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी, जिसमें फिल्ट्रेशन, क्लोरीनेशन और लैब टेस्टिंग शामिल रही।
इसके बाद पानी की गुणवत्ता की जांच नगर निगम की लैब में कराई गई। टेस्ट के दौरान पानी को मानकों के अनुरूप पाया गया और उसे पीने योग्य घोषित किया गया। इसी मौके पर महापौर मालती राय ने कहा कि शहर में गर्मी के चलते पानी की खपत काफी बढ़ गई है, जिससे कुछ इलाकों में कम प्रेशर की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम लगातार व्यवस्था सुधारने में जुटा है।
महापौर ने स्पष्ट रूप से कहा कि बड़े तालाब से आने वाला पानी पूरी तरह शुद्ध है और जिन क्षेत्रों में यह सप्लाई किया जा रहा है, वहां के लोगों को RO लगाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्टर प्लांट से गुजरने के बाद पानी पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है और इसकी गुणवत्ता लगातार मॉनिटर की जाती है।
निरीक्षण के दौरान एक रोचक दृश्य भी देखने को मिला, जब लैब टेस्ट में पास हुए पानी को महापौर के सामने ही बीजेपी जिलाध्यक्ष रविंद्र यती और अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने पीकर उसकी गुणवत्ता पर भरोसा जताया। इस कदम को प्रशासनिक स्तर पर जनता के भरोसे को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
महापौर ने आगे बताया कि भोपाल शहर में पानी की सप्लाई मुख्य रूप से चार स्रोतों से होती है। इनमें कोलार डैम प्रमुख है, जो शहर के बड़े हिस्से को पानी उपलब्ध कराता है। इसके अलावा केरवा डैम, बड़े तालाब और नर्मदा नदी से भी अलग-अलग इलाकों में जलापूर्ति की जाती है। कोलार रोड और आसपास के क्षेत्रों में केरवा डैम का पानी पहुंचता है, जबकि लालघाटी और कोहेफिजा क्षेत्र में बड़े तालाब का पानी सप्लाई होता है। होशंगाबाद रोड और उससे जुड़ी कॉलोनियों में नर्मदा का पानी दिया जाता है।
निरीक्षण के बाद महापौर ने भरोसा जताया कि नगर निगम शहरवासियों को स्वच्छ और पर्याप्त जल आपूर्ति देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की जल गुणवत्ता में समझौता नहीं किया जाएगा।