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सिरसौद में राशन वितरण पर बवाल: हितग्राहियों ने गेहूं-चावल में कटौती और अवैध वसूली के लगाए आरोप


शिवपुरी । शिवपुरी जिले के करेरा अनुविभाग के सिरसौद गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें निर्धारित मात्रा से कम गेहूं और चावल दिया जा रहा है, साथ ही राशन देने के बदले अतिरिक्त पैसे भी वसूले जा रहे हैं।

मामला तब सामने आया जब ग्रामीणों ने राशन वितरण के दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इन वीडियो के सामने आने के बाद गांव में हड़कंप मच गया और लोगों ने खुलकर अपनी शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दीं।

ग्रामीणों के अनुसार, कई हितग्राहियों को 2 से 3 किलो तक कम राशन दिया जा रहा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति 10 से 20 रुपये तक अतिरिक्त वसूली भी की जा रही है। लोगों का आरोप है कि यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब जाकर मामला उजागर हुआ है।

प्रेम नारायण नामक ग्रामीण ने बताया कि उन्हें दो महीने के राशन के बदले 22 किलो गेहूं और 6 किलो चावल मिला, जबकि निर्धारित मात्रा से 2 किलो कम अनाज दिया गया। साथ ही उनसे 10 रुपये अतिरिक्त लिए गए। इसी तरह पुष्पेंद्र लोधी ने भी आरोप लगाया कि उन्हें 20 किलो गेहूं और 8 किलो चावल के बजाय कम मात्रा में राशन मिला और 10 रुपये अतिरिक्त वसूले गए।

अन्य ग्रामीणों ने भी समान आरोप लगाए हैं। मुकेश पाल ने कहा कि उन्हें 60 किलो गेहूं और 10 किलो चावल दिया गया, लेकिन उसमें भी 2 किलो की कमी पाई गई और 20 रुपये अतिरिक्त लिए गए। वहीं धनीराम शिवहरे का कहना है कि दो व्यक्तियों के हिस्से का राशन लेने पर उन्हें 3 किलो अनाज कम मिला और अतिरिक्त पैसे भी लिए गए।

इन आरोपों के बाद गांव में नाराजगी बढ़ गई है और लोग राशन दुकान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वायरल वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया है, जिसके बाद प्रशासनिक जांच की मांग भी तेज हो गई है।

दूसरी ओर, राशन दुकान के सेल्समैन सुमित लोधी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वह पहली बार राशन वितरण कर रहे हैं और इससे पहले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यह कार्य किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

फिलहाल मामला तूल पकड़ चुका है और स्थानीय प्रशासन से जांच की उम्मीद की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ी अनियमितताओं का संकेत होगा।

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