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विदेश नीति में बड़ा बदलाव: नेपाल ने राजदूत चयन के लिए अपनाया पारदर्शी प्रतियोगी मॉडल, वैश्विक मिशनों पर नजर


नई दिल्ली । नेपाल ने अपनी विदेश नीति और प्रशासनिक ढांचे में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करते हुए पहली बार राजदूतों की नियुक्ति के लिए खुली प्रतियोगी प्रक्रिया शुरू की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में नेपाल के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि बनने के लिए योग्य नागरिकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। सरकार का यह कदम लंबे समय से चली आ रही उस परंपरा को बदलने की दिशा में माना जा रहा है, जिसमें राजनीतिक भागीदारी और दलगत समीकरणों के आधार पर राजदूतों की नियुक्ति की जाती रही है। अब इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि विदेशों में नेपाल का प्रतिनिधित्व अधिक सक्षम और पेशेवर ढंग से हो सके।

नई प्रक्रिया के तहत जारी किए गए कार्यक्षेत्र और शर्तों में स्पष्ट किया गया है कि उम्मीदवार की आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए और उसके पास न्यूनतम स्नातक डिग्री अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति विज्ञान, कानून, अर्थशास्त्र या सार्वजनिक प्रशासन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और बहुपक्षीय वार्ताओं का अनुभव रखने वाले आवेदकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों का नेपाल की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीतिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ होना आवश्यक है।

इस चयन प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं बल्कि पेशेवर अनुभव और नैतिक मानकों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। आवेदक के पास किसी विदेशी देश में स्थायी निवास या इमिग्रेशन लाभ नहीं होना चाहिए और न ही उसके खिलाफ किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या अनैतिक आचरण का रिकॉर्ड होना चाहिए। इसके अलावा, उम्मीदवार का उस देश में कोई हितों का टकराव नहीं होना चाहिए, जहां उसे नियुक्त किया जाना है। सरकार ने यह भी शर्त रखी है कि आवेदक किसी ऐसे संगठन से जुड़ा न हो जिसे विदेशी सहायता या अंतरराष्ट्रीय फंडिंग प्राप्त होती हो, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

नई नीति में राजदूतों की भूमिका को केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक और विकासात्मक कूटनीति से भी जोड़ा गया है। राजदूतों से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने-अपने देशों में नेपाल के व्यापार, निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही प्रवासी नेपाली नागरिकों के हितों की रक्षा, सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मंचों पर नेपाल की छवि को बेहतर बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

इस प्रक्रिया में अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझ को अनिवार्य योग्यता के रूप में रखा गया है। वियना कन्वेंशन जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों की जानकारी भी आवश्यक मानी गई है। चयनित राजदूतों का कार्यकाल चार वर्ष निर्धारित किया गया है, हालांकि सरकार आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समय से पहले भी वापस बुला सकती है। आवेदन की अंतिम तिथि 5 जून तय की गई है, जिसके बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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