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धोखाधड़ी मामलों में गिरावट के बावजूद बैंकिंग सिस्टम को भारी झटका, तीन साल में रकम चार गुना तक बढ़ी

नई दिल्ली । देश के बैंकिंग क्षेत्र में सामने आए ताज़ा आंकड़े एक विरोधाभासी तस्वीर पेश कर रहे हैं, जहां एक तरफ धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर इन मामलों से जुड़े वित्तीय नुकसान में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। एक हालिया वार्षिक वित्तीय आकलन के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी मामलों की संख्या घटकर लगभग 10,114 रह गई, जबकि एक वर्ष पहले यह संख्या 23,722 के करीब थी। इसके बावजूद इन मामलों में शामिल कुल रकम बढ़कर लगभग 48,021 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। यह स्थिति इस ओर संकेत करती है कि छोटे स्तर की धोखाधड़ी कम हुई है, लेकिन बड़े और जटिल वित्तीय घोटालों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों के दौरान यह रुझान और अधिक स्पष्ट हो गया है, जिसमें मामलों की संख्या लगातार कम होती गई लेकिन वित्तीय नुकसान कई गुना बढ़ता गया। विशेष रूप से बैंकिंग प्रणाली में कर्ज और एडवांस से जुड़े धोखाधड़ी मामलों ने सबसे बड़ा योगदान दिया है, जो कुल धोखाधड़ी राशि का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यह दर्शाता है कि बैंकिंग संस्थानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब डिजिटल या छोटे स्तर की धोखाधड़ी नहीं बल्कि बड़े कॉरपोरेट और लोन आधारित घोटाले बन चुके हैं।

सरकारी बैंकों पर इन धोखाधड़ी मामलों का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है, जहां नुकसान की राशि में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी से होने वाला वित्तीय नुकसान 35,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 51 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कुल धोखाधड़ी राशि में इन बैंकों की हिस्सेदारी भी बढ़कर तीन-चौथाई के करीब पहुंच गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस चुनौती का सबसे बड़ा बोझ उठा रहे हैं।

दूसरी ओर निजी बैंकों में भी धोखाधड़ी की रकम में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि वहां इसका दायरा अपेक्षाकृत सीमित रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अंतर बैंकिंग मॉडल, जोखिम मूल्यांकन और ऋण वितरण प्रक्रियाओं में अंतर के कारण देखा जा रहा है। वहीं डिजिटल भुगतान, कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि तकनीकी सुरक्षा उपायों ने छोटे साइबर फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है।

हालांकि डिजिटल क्षेत्र में सुधार के बावजूद बड़े वित्तीय घोटाले बैंकिंग व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। कर्ज आधारित धोखाधड़ी मामलों में लगातार वृद्धि इस बात की ओर इशारा करती है कि ऋण मंजूरी और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही वित्तीय संस्थानों को जोखिम आकलन और अनुपालन तंत्र को अधिक सख्त करने की दिशा में कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े नुकसान को रोका जा सके।

कुल मिलाकर यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ी का स्वरूप बदल रहा है। जहां छोटे और डिजिटल फ्रॉड पर नियंत्रण बढ़ा है, वहीं बड़े वित्तीय घोटाले अब सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं, जिनका सीधा असर अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर पड़ सकता है।

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