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चालान से लेकर अनुभव तक होगी पूरी जांच, ट्रक ड्राइवरों के लिए रेटिंग सिस्टम पर सरकार का विचार

नई दिल्ली । देश में वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में लगातार बढ़ रही कुशल चालकों की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार एक नई पहल पर काम कर रही है। इस योजना के तहत ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहन चलाने वाले चालकों के लिए एक विशेष रेटिंग आधारित ‘ड्राइवर इंडेक्स’ विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य चालकों के कौशल, अनुभव और सड़क सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर उनकी रैंकिंग तय करना है, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बन सके।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस दिशा में प्रारंभिक स्तर पर कार्य कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस रेटिंग प्रणाली में चालक के पेशेवर रिकॉर्ड से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जा सकता है। इनमें ड्राइविंग अनुभव, लाइसेंस की वैधता अवधि, यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े चालान, बीमा संबंधी जानकारी और सड़क सुरक्षा मानकों के पालन जैसे बिंदु प्रमुख होंगे। इन सभी मापदंडों के आधार पर प्रत्येक चालक का एक समग्र मूल्यांकन तैयार किया जाएगा, जिससे उसके कौशल और विश्वसनीयता का आकलन किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्रणाली लागू होने से परिवहन कंपनियों को योग्य और अनुभवी चालकों की पहचान करने में आसानी होगी। वर्तमान में कई कंपनियां चालक चयन के दौरान सीमित सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेती हैं, जिसके कारण कई बार अपेक्षित स्तर के चालक उपलब्ध नहीं हो पाते। नई व्यवस्था इस चुनौती को काफी हद तक कम कर सकती है और उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकती है।

सरकार इस परियोजना के तकनीकी और विश्लेषणात्मक पहलुओं पर भी काम कर रही है। इसके लिए शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों की सहायता ली जा रही है ताकि एक वैज्ञानिक और निष्पक्ष रेटिंग मॉडल तैयार किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस सूचकांक की सफलता उसके मापदंडों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर निर्भर करेगी। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है तो भविष्य में यह वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में भर्ती का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

देश में कुशल चालकों की कमी लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के बावजूद प्रशिक्षित चालकों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार पहले भी चालक प्रशिक्षण संस्थानों के विस्तार और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास पर जोर दे चुकी है। इसके तहत देशभर में बड़ी संख्या में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी ताकि पेशेवर और सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा दिया जा सके।

विशेष रूप से भारी और आधुनिक वाणिज्यिक वाहनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित चालकों की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक ट्रकों और उन्नत परिवहन प्रणालियों के विस्तार को देखते हुए चालक प्रशिक्षण और मूल्यांकन की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। सरकार का मानना है कि रेटिंग आधारित ड्राइवर इंडेक्स न केवल योग्य चालकों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा, बल्कि सड़क सुरक्षा, परिवहन दक्षता और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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