मुख्यमंत्री ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, लेकिन हरियाणा सरकार से मुनक नहर के माध्यम से न्यूनतम 1,000 क्यूसेक जल आपूर्ति बनाए रखने का आश्वासन मिला है, जिससे स्थिति को संतुलित रखने में मदद मिल रही है। इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड द्वारा 980 से अधिक जल टैंकरों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों ट्रिप संचालित किए जा रहे हैं, ताकि घनी आबादी और संकरी गलियों वाले क्षेत्रों में भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने छोटे टैंकरों की तैनाती भी बढ़ाई है, जिससे दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सके।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि यमुना में वजीराबाद क्षेत्र के पास जल स्तर में गिरावट के कारण आपूर्ति पर असर पड़ा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से चर्चा की, जिसके बाद जल आपूर्ति को बनाए रखने का आश्वासन प्राप्त हुआ। साथ ही यमुना खादर क्षेत्र में अतिरिक्त बोरवेल स्थापित कर प्रतिदिन 10.5 एमजीडी अतिरिक्त जल उत्पादन की क्षमता विकसित की गई है, जिससे आपूर्ति प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिली है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल रिसाव और बर्बादी की घटनाओं को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए और कहा कि जल की हर बूंद मूल्यवान है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और अधिकारी स्वयं फील्ड में जाकर स्थिति का निरीक्षण करें। हाल के आंकड़ों के अनुसार जल बोर्ड हेल्पलाइन पर हजारों शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से अधिकांश का समाधान किया जा चुका है, जबकि शेष पर तेजी से कार्य जारी है।
दीर्घकालिक समाधान के तहत सरकार पाइपलाइन आधारित जल आपूर्ति, नए जल शोधन संयंत्रों की स्थापना, यमुना की सफाई और डी-सिल्टिंग जैसे कार्यों पर भी तेजी से काम कर रही है। इसके साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्षा जल संचयन संरचनाओं का विस्तार किया जा रहा है और ड्यूल वाटर सप्लाई सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है, ताकि शोधन जल का उपयोग गैर-पेय कार्यों में किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर देते हुए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि केवल आपूर्ति बढ़ाने से नहीं, बल्कि जिम्मेदार उपयोग और संरक्षण से ही जल संकट का स्थायी समाधान संभव है।