ममता बनर्जी के अनुसार, कथित हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को अस्पताल के आईटीयू में भर्ती कराया गया था, जहां उनका विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण किया गया। इसमें कई महत्वपूर्ण जांचें शामिल थीं, जिनके बाद चिकित्सकों ने उनकी स्थिति पर निगरानी रखी। हालांकि, ममता का आरोप है कि इसके बावजूद बाहरी दबाव के कारण उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने का निर्णय लिया गया, जबकि उनकी चिकित्सकीय स्थिति को लेकर स्पष्ट सावधानी बरतने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि अब अभिषेक का इलाज घर पर ही किया जाएगा और पारिवारिक चिकित्सक उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे।
टीएमसी प्रमुख ने इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि मरीज को आईटीयू में रखा गया था तो यह संकेत देता है कि उनकी स्थिति सामान्य नहीं थी, ऐसे में उन्हें अचानक छुट्टी देना कई सवाल खड़े करता है। ममता बनर्जी ने इसे चिकित्सा निर्णय में बाहरी हस्तक्षेप का उदाहरण बताया और कहा कि इस तरह की स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रश्न उठाती है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि हमले के दौरान अभिषेक बनर्जी को गंभीर चोटें आई थीं और उनके शरीर में ब्लड क्लॉट्स पाए गए हैं। ममता ने कहा कि यदि उन्होंने हेलमेट नहीं पहना होता तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी। उन्होंने बताया कि घर पर ही अब चिकित्सकीय उपकरणों के साथ उपचार की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे।
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन को विभिन्न स्तरों से दबाव भरे फोन कॉल प्राप्त हो रहे थे, जिससे चिकित्सकीय निर्णय प्रभावित होने की आशंका बनी। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अपनी पेशेवर जिम्मेदारी को समझते हैं, लेकिन बाहरी दबाव के चलते उनके लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना कठिन हो रहा था। इस पूरे घटनाक्रम को उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वास्थ्य संस्थानों की स्वायत्तता पर गंभीर चिंता का विषय बताया।
राजनीतिक स्तर पर ममता बनर्जी ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल एक चिकित्सा मामला नहीं बल्कि राजनीतिक हस्तक्षेप का उदाहरण है। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक संस्थानों की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है और मामले ने व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है।