Mahakaushal Times

सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

 मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में एक महिला द्वारा न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क पर बैठने का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला अपनी बेटी के साथ हुई कथित मारपीट की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि उसकी FIR दर्ज करने के बजाय उसे अलग-अलग थानों के बीच भटकाया जाता रहा। इस पूरी प्रक्रिया में महिला घंटों तक थाने के बाहर बैठी रही और अंततः वह थक-हारकर सड़क पर ही बैठ गई, जबकि उसके साथ छोटा बच्चा भी मौजूद था। यह स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब शाम से लेकर देर रात तक पीड़िता न्याय की उम्मीद में वहीं मौजूद रही।

बताया जा रहा है कि घटना उस समय की है जब पीड़िता की बेटी जंगल में बकरी चराने गई थी और किसी विवाद के दौरान कुछ लोगों द्वारा उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया। परिजनों का कहना है कि इस घटना में युवती गंभीर रूप से घायल हुई और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता को एक थाने से दूसरे थाने भेजना शुरू कर दिया। इस व्यवहार से आहत होकर महिला थाने के बाहर बैठने को मजबूर हो गई।

महिला का कहना है कि वह लगातार पुलिस से गुहार लगाती रही कि उसकी शिकायत दर्ज कर उचित जांच की जाए, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि कई बार उसे यह कहकर टाल दिया गया कि संबंधित थाना जाकर शिकायत दर्ज कराएं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़िता अपने छोटे बच्चे के साथ असहाय स्थिति में रही, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आई यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता पर सवाल खड़े करती है। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को क्षेत्राधिकार के तकनीकी पहलू में उलझने के बजाय तुरंत प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए Zero FIR दर्ज करनी चाहिए, ताकि पीड़ित को राहत मिल सके और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

घटना का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है। अब यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है और लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। फिलहाल देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए किस तरह की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर