भुवनेश्वर कुमार ने कहा, “मुझे ट्रॉफी चाहिए थी, पर्पल कैप नहीं। यह सीजन हमारे लिए बेहद खास रहा और हमने शुरुआत से ही मजबूत रणनीति के साथ खेला।” उन्होंने बताया कि लगातार विकेट लेने से आत्मविश्वास बढ़ता है और बड़े मैचों में यह अनुभव काफी काम आता है।
भुवनेश्वर इस सीजन में आरसीबी के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 16 मैचों में 28 विकेट लिए और सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे। उनसे आगे केवल गुजरात टाइटंस के कगिसो रबाडा रहे, जिन्होंने 29 विकेट झटके, हालांकि उन्होंने एक मैच ज्यादा खेला था।
टीम की जीत में बल्लेबाजों का भी अहम योगदान रहा। देवदत्त पड्डिकल ने कहा कि इस टीम के साथ खेलना एक शानदार अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि टीम में मौजूद बड़े खिलाड़ियों से सीखने का मौका मिला और गेंदबाजों ने बेहतरीन योजनाओं के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने विशेष रूप से विराट कोहली की बल्लेबाजी और उनके रन बनाने की भूख की तारीफ की।
विकेटकीपर बल्लेबाज जितेश शर्मा ने भी टीम मैनेजमेंट की रणनीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम का फोकस दबाव में भी प्रक्रिया पर टिके रहने पर था, न कि सिर्फ नतीजों पर। इसी सोच ने टीम को मजबूत बनाए रखा और लगातार जीत की ओर बढ़ाया।
वहीं तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड ने कहा कि टीम का माहौल और सपोर्ट स्टाफ बेहद मजबूत है, जिसने खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भुवनेश्वर की लगातार विकेट लेने की क्षमता को टीम के लिए बड़ा प्लस पॉइंट बताया।
फाइनल मुकाबले की बात करें तो गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट पर 155 रन बनाए। जवाब में RCB ने विराट कोहली की नाबाद 75 रनों की शानदार पारी की बदौलत 18 ओवर में 5 विकेट पर 161 रन बनाकर मैच जीत लिया।
इस जीत के साथ RCB ने लगातार दूसरी बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की और टीम ने एक बार फिर साबित किया कि संतुलित प्रदर्शन और मजबूत रणनीति ही सफलता की कुंजी है।