MP News : भोपाल। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने मध्य प्रदेश के कटनी से BJP विधायक और पूर्व मंत्री संजय पाठक पर आदिवासी भूमि हड़पने के गंभीर आरोपों की जांच शुरू कर दी है। आयोग ने जबलपुर, सिवनी, डिंडोरी, कटनी और उमरिया जिलों के कलेक्टरों को नोटिस जारी किया है। इन जिलों से बैगा जनजाति की भूमि खरीदी के तथ्य और रिपोर्ट एक महीने के अंदर मांगी गई है। रिपोर्ट न आने पर कलेक्टरों या उनके प्रतिनिधियों को समन जारी कर तलब किया जाएगा।
घोटाले का आरोप क्या है? (MP News)
कटनी निवासी शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने NCST को शिकायत की कि पाठक परिवार ने 4 गरीब आदिवासियों (नाथू कोल, प्रह्लाद कोल, राकेश सिंह गौड़, रघुराज सिंह गौड़) के नाम का दुरुपयोग कर 5 जिलों में 1,173 एकड़ आदिवासी भूमि खरीदी। ये आदिवासी कथित तौर पर विधायक के कर्मचारी हैं। शिकायत में दावा है कि यह धोखाधड़ी से अरबों रुपये की बेनामी संपत्ति अर्जित करने का मामला है।
NCST का संज्ञान और निर्देश (MP News)
NCST ने शिकायत को गंभीर मानते हुए 5 जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि एक महीने में प्रकरण के तथ्य और टिप्पणियां व्यक्तिगत रूप से या अन्य माध्यम से भेजें। डिंडोरी कलेक्टर ने जांच पूरी कर रिपोर्ट भेज दी है, लेकिन बाकी चार जिलों (जबलपुर, सिवनी, कटनी, उमरिया) से अभी जवाब नहीं आया। आयोग ने अंतिम चेतावनी दी है।
पाठक पर पहले भी कई आरोप (MP News)
यह पहला मामला नहीं है। पाठक पर पहले से ही कई विवादास्पद आरोप लगे हैं।
आदिवासी भूमि घोटाला – नवंबर 2025 में आदिवासी संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। दावा किया कि 1,135 एकड़ भूमि 4 कर्मचारियों के नाम खरीदी गई। चारों कथित तौर पर लापता हैं।
सहारा ग्रुप लैंड स्कैम – फरवरी 2025 में EOW ने नोटिस जारी किया। पाठक से जुड़ी कंपनियों ने भोपाल, जबलपुर, कटनी में सहारा की 310 एकड़ भूमि 88 करोड़ में खरीदी, जबकि बाजार मूल्य 1,000 करोड़ था। स्टांप ड्यूटी चोरी का आरोप।
वाइल्डलाइफ पॉचिंग केस – अक्टूबर 2025 में एक बिजनेसमैन ने आरोप लगाया कि पाठक ने उसके फार्महाउस में जानवरों के अवशेष गाड़वाए। CBI जांच की मांग।
माइनिंग स्कैम – सितंबर 2025 में हाईकोर्ट के जज ने कहा कि पाठक ने जज को प्रभावित करने की कोशिश की।
पाठक मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायकों में से एक हैं, जिनकी संपत्ति 226 करोड़ से ज्यादा है। वे 2008 से विजयराघवगढ़ से विधायक हैं। BJP ने अभी चुप्पी साध रखी है, लेकिन विपक्ष ने इसे “माइनिंग माफिया राज” बताया है। NCST की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार कार्रवाई कर सकती है। आदिवासी संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। पाठक ने सभी आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। मामला NCST के पास है, इसलिए राजनीतिक दबाव कम है।