Jabalpur High Court : जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ (जस्टिस हिमांशु जोशी) ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा – “देश में जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं, ऐसे में भू-माफियाओं की नजर हर जगह है। आज व्यक्ति के लिए अपनी ही जमीन को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।”
शहडोल के ग्राम सोखी में कुछ जमीन खरीदी थी (Jabalpur High Court)
यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश (गाजी नगर) की रहने वाली विधवा ज्योतिराज बालादास की याचिका पर आई। उनके पति रेलवे लोको पायलट थे और 2022 में निधन हो गया। पति ने शहडोल के ग्राम सोखी में कुछ जमीन खरीदी थी। अब ज्योतिराज अपनी नाबालिग बेटी के साथ सैकड़ों किलोमीटर दूर रहती हैं और जमीन की देखभाल करना नामुमकिन हो रहा है। भू-माफियाओं के डर से उन्होंने हाईकोर्ट में जमीन बेचने की अनुमति मांगी।
कोर्ट ने जमीन बेचने की इजाजत दे दी (Jabalpur High Court) :
जमीन बिक्री से मिली राशि का 50% हिस्सा नाबालिग बेटी के नाम राष्ट्रीयकृत बैंक में FD के रूप में जमा करना होगा। यह पैसा बेटी के 18 साल पूरा होने पर ही निकाला जा सकेगा। कोर्ट ने माना कि इतनी दूर रहने वाली विधवा के लिए जमीन की सुरक्षा और देखरेख असंभव है। साथ ही भू-माफियाओं की बढ़ती दबंगई को देखते हुए यह कदम जरूरी है।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट योगेश सिंह बघेल और प्रवीण मिश्रा ने पक्ष रखा। कोर्ट की यह टिप्पणी देशभर में जमीन हड़पने के बढ़ते मामलों पर करारा तमाचा मानी जा रही है। लोगों का कहना है – “जब कोर्ट भी मान रहा है कि अपनी जमीन बचाना जंग लड़ने जैसा हो गया है।”