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जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां


नई दिल्ली । फुटबॉल के सबसे बड़े मंच FIFA World Cup में जहां हर खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलना सपना मानता है, वहीं कुछ परिवार ऐसे भी रहे हैं जिनमें यह सपना दो पीढ़ियों तक पूरा हुआ। कई दिग्गज खिलाड़ियों ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व कप में जगह बनाई।

1. लुइस और मारियो पेरेज (मेक्सिको)
पिता लुइस पेरेज ने 1930 के विश्व कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व किया था। उनके बेटे मारियो पेरेज ने 1950 के वर्ल्ड कप में राष्ट्रीय टीम की ओर से खेला। हालांकि दोनों ही अपने-अपने विश्व कप में गोल नहीं कर सके।

2. मार्टी और जोस वैंटोलरा (स्पेन/मेक्सिको)
मार्टी वैंटोलरा 1934 में स्पेन की टीम का हिस्सा थे, जबकि उनके बेटे जोस वैंटोलरा ने 1970 में मेक्सिको के लिए विश्व कप खेला। दोनों ही खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो पाए।

3. डोमिंगोस और अदेमिर दा गुइया (ब्राजील)
डोमिंगोस ने 1938 में Brazil national football team की ओर से विश्व कप खेला। उनके बेटे अदेमिर दा गुइया 1974 में ब्राजील टीम का हिस्सा रहे, लेकिन सीमित अवसरों में उन्हें भी गोल नहीं मिला।

4. रोजर और पैट्रिस रियो (फ्रांस)
रोजर रियो ने 1934 में France national football team के लिए विश्व कप खेला। उनके बेटे पैट्रिस रियो 1978 में फ्रांस की टीम में शामिल रहे, लेकिन वे भी गोल नहीं कर सके।

5. निकोले और इओन लुपस्कु (रोमानिया)
निकोले लुपस्कु ने 1970 विश्व कप में रोमानिया का प्रतिनिधित्व किया। उनके बेटे इओन लुपस्कु 1990 और 1994 के वर्ल्ड कप में टीम का हिस्सा रहे और कुल 8 मैच खेले, लेकिन गोल नहीं कर पाए।

विरासत की कहानी
ये सभी जोड़ियां इस बात का प्रतीक हैं कि विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली फुटबॉल परंपरा भी है, जहां एक ही परिवार का नाम दो अलग-अलग युगों में इतिहास बनाता है।

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