Mahakaushal Times

“NEET दोबारा करा लोगे, बेटी लौटा पाओगे?”-परिवार का दर्द और राहुल के बयान पर मचा राजनीतिक घमासान


नई दिल्ली: NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और अनिश्चितता के बीच नागपुर में आत्महत्या करने वाली मऊगंज की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। परिवार गहरे सदमे में है और मां की आंखों से निकलता हर शब्द दर्द की कहानी बयां कर रहा है। मां नीलम चतुर्वेदी का कहना है, “पेपर तो दोबारा करा लोगे, लेकिन मेरी बेटी को लौटा पाओगे क्या?”

घटना के बाद मामला केवल पारिवारिक त्रासदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने आकांक्षा की मौत को सिस्टम की विफलता बताया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परीक्षा में अनिश्चितता ने छात्रा के भविष्य और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाला, जिससे यह दुखद कदम उठाना पड़ा।

राहुल गांधी का सरकार पर हमला, BJP ने किया पलटवार
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि यह घटना केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल उठाए। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी पर “प्रोपेगेंडा फैलाने” का आरोप लगाया। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष भय और भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। इस बयानबाजी के बीच मामला लगातार गरमाता जा रहा है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

परिवार का दर्द: कर्ज, संघर्ष और टूटे सपने
उधर मऊगंज स्थित परिवार में मातम पसरा है। परिवार के अनुसार आकांक्षा बेहद मेधावी छात्रा थी और डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए 15–20 लाख रुपये तक का कर्ज लिया था। आर्थिक दबाव और भविष्य की उम्मीदों के बीच परिवार संघर्ष कर रहा था। मां ने रोते हुए बताया कि परिवार पहले ही भारी कर्ज में डूबा हुआ था, और बेटी पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था। पिता की तबीयत भी खराब बताई जा रही है और वे अस्पताल में भर्ती हैं।

डिप्रेशन और तनाव की स्थिति ने बढ़ाई चिंता
परिजनों के अनुसार, पेपर लीक की खबरों के बाद छात्रा मानसिक तनाव में आ गई थी। परीक्षा परिणाम और भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से वह चुपचाप रहने लगी थी और उसने खाना-पीना भी कम कर दिया था।

गांव में मातम और डर का माहौल
इस घटना के बाद गांव में भी गहरा असर देखने को मिल रहा है। लोग अपनी बेटियों को बाहर पढ़ाई के लिए भेजने को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों में डर और असुरक्षा का माहौल है।

आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि परीक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामला राजनीतिक बहस और सामाजिक चिंता दोनों का केंद्र बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर