समझौते के अनुसार, अक्टूबर 2026 से जून 2029 तक गूगल हर महीने निर्धारित भुगतान के बदले उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं का उपयोग करेगा। पूरे अनुबंध की अनुमानित कीमत लगभग 30 अरब डॉलर आंकी गई है। यह करार मौजूदा समय में एआई क्षेत्र में हो रहे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है और इससे तकनीकी कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी स्पष्ट होती है।
इस व्यवस्था के तहत गूगल को लगभग 1,10,000 एनवीडिया जीपीयू के साथ-साथ सीपीयू, मेमोरी और अन्य आवश्यक हार्डवेयर संसाधनों तक पहुंच प्राप्त होगी। इन संसाधनों का उपयोग विशेष रूप से बड़े भाषा मॉडल, जनरेटिव एआई एप्लिकेशन, क्लाउड प्लेटफॉर्म और एंटरप्राइज एआई समाधानों के विकास एवं संचालन में किया जाएगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता गूगल की एआई सेवाओं को नई गति प्रदान कर सकती है।
उच्च प्रदर्शन वाले एनवीडिया एच200 चिप्स के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि उपलब्ध कराई जाने वाली कंप्यूटिंग शक्ति 100 मेगावाट से अधिक हो सकती है। यह क्षमता आधुनिक एआई मॉडल के प्रशिक्षण और संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्तमान समय में एआई उद्योग की सबसे बड़ी चुनौतियों में पर्याप्त कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता शामिल है, जिसके कारण बड़ी तकनीकी कंपनियां लगातार नए डेटा सेंटर और हार्डवेयर संसाधनों में निवेश कर रही हैं।
समझौते में प्रदर्शन और समयसीमा से जुड़े स्पष्ट प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। यदि निर्धारित समय तक आवश्यक एनवीडिया चिप्स और संबंधित संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, तो गूगल को अनुबंध समाप्त करने का अधिकार प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त दोनों पक्षों को पूर्व सूचना देकर समझौते से बाहर निकलने का विकल्प भी दिया गया है। इससे अनुबंध में लचीलापन और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
गूगल का मानना है कि उसके एआई उत्पादों, एजेंट आधारित प्लेटफॉर्म और जेमिनी एंटरप्राइज सेवाओं की मांग अपेक्षा से अधिक तेजी से बढ़ रही है। इसी कारण अतिरिक्त कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता महसूस की गई। कंपनी के क्लाउड कारोबार में भी तेजी देखी जा रही है, जहां लंबी अवधि के अनुबंधों का मूल्य लगातार बढ़ रहा है। यह संकेत देता है कि कॉरपोरेट और एंटरप्राइज ग्राहक बड़े पैमाने पर एआई आधारित समाधानों को अपना रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता केवल दो कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग नहीं बल्कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की वैश्विक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण संकेत है। बड़े डेटा सेंटर, उन्नत प्रोसेसर और विशाल कंप्यूटिंग नेटवर्क भविष्य की तकनीकी बढ़त तय करेंगे। ऐसे में यह करार आने वाले वर्षों में एआई उद्योग की दिशा और निवेश प्रवृत्तियों को प्रभावित कर सकता है।