इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। जटाधारी भगवान महाकाल को चंदन तिलक, भांग, त्रिपुंड और आभूषण अर्पित कर उन्हें राजा स्वरूप में भव्य रूप से श्रृंगारित किया गया।
भस्म आरती की शुरुआत पारंपरिक प्रथम घंटा बजाकर की गई, जिसके बाद मंत्रोच्चार के बीच हरिओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती की गई। पूरे वातावरण में “हर हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे।
श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर विधिवत भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। मोगरा और गुलाब की खुशबू से पूरा मंदिर परिसर महक उठा।
भक्तों ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रही।
महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जो इस आरती को और भी विशेष बना देता है।