सरकारी एजेंसियों की फैक्ट चेक यूनिट ने इस पूरे मामले पर स्पष्ट किया है कि यह नोटिस पूरी तरह फर्जी है और BSNL की ओर से ऐसा कोई संदेश जारी नहीं किया जाता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान संदेश, ईमेल या कॉल पर भरोसा न करें और न ही उसमें दिए गए नंबर या लिंक पर संपर्क करें।
यह फर्जी नोटिस इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें उपभोक्ता को तुरंत कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया जाए। इसमें लिखा होता है कि KYC न होने पर सिम सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। साइबर ठग इसी डर का फायदा उठाकर लोगों को कॉल करने या लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति दिए गए संपर्क माध्यम से जुड़ता है, उससे बैंक डिटेल्स, OTP और अन्य संवेदनशील जानकारी मांग ली जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के स्कैम में सबसे बड़ा हथियार डर और जल्दबाजी होता है। ठग समय सीमा का दबाव बनाकर यूजर को सोचने का मौका नहीं देते। कई मामलों में लोग बिना जांच किए जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे उनके बैंक खातों से रकम चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।
PIB फैक्ट चेक ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि BSNL या किसी भी सरकारी दूरसंचार संस्था द्वारा इस तरह के KYC सस्पेंशन नोटिस नहीं भेजे जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में उपयोगकर्ताओं को अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या OTP किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में तेजी आई है और इसमें टेलीकॉम कंपनियों के नाम का दुरुपयोग आम हो गया है। ऐसे में उपयोगकर्ताओं को सतर्क रहने और केवल आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जा रही है।
सरकारी एजेंसियों ने यह भी कहा है कि यदि किसी उपभोक्ता को ऐसा कोई संदेश मिलता है तो उसे तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए और संदेश में दिए गए किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। साथ ही मोबाइल और एप्लिकेशन को समय-समय पर अपडेट रखना भी साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी बताया गया है।
डिजिटल भुगतान और मोबाइल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच इस तरह के फर्जीवाड़े लोगों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव उपाय माना जा रहा है।