कृषि विभाग का मानना है कि खरीफ मौसम में उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ ही कालाबाजारी और अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में आम नागरिकों और किसानों की भागीदारी से निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सरकार ने लोगों को सीधे सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।
योजना के तहत किसान, आम नागरिक, व्यापारी या कोई भी व्यक्ति खाद से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी विभाग को दे सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का आश्वासन भी दिया गया है ताकि लोग बिना किसी डर के शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायतें मुख्यमंत्री किसान हेल्पलाइन नंबर 155253 पर दर्ज कराई जा सकती हैं। यह हेल्पलाइन कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सक्रिय रहेगी।
कृषि विभाग के अनुसार सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई जाएगी। कलेक्टर के निर्देशन में गठित टीम शिकायत की सत्यता की पुष्टि करेगी। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है और संबंधित मामले में जब्ती, कार्रवाई या दोष सिद्ध होता है, तो सूचना देने वाले व्यक्ति को ₹1000 की प्रोत्साहन राशि सीधे उसके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान कृषि वर्ष 2026-27 के बजट से किए जाएंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पहल से खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे।
इसी बीच खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश में खाद वितरण और बिक्री में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि कई जिलों से किसानों और किसान संगठनों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें डीएपी, एसएसपी और अन्य उर्वरकों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दरों पर बेचे जाने के आरोप लगाए गए हैं।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर पुराने स्टॉक की खाद को नई बढ़ी हुई दरों पर बेचा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि पूरे प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था की विशेष जांच कराई जाए, किसानों से कथित रूप से अधिक वसूली गई राशि वापस कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण को लेकर सरकार और प्रशासन की निगरानी अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में इस योजना के परिणाम किसानों और कृषि क्षेत्र पर सीधे प्रभाव डाल सकते हैं।