नई दिल्ली । वैश्विक रोजगार बाजार में भारतीय पेशेवरों की मजबूत उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। दुनिया के प्रमुख वीजा कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय भर्ती रुझानों से जुड़े हालिया आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत अब कुशल प्रतिभाओं का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की बढ़ती मांग ने देश की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वीजा कार्यक्रमों में शीर्ष स्थानों पर बना हुआ है। अमेरिका के उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए बनाए गए वीजा कार्यक्रम में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। वहीं ब्रिटेन और यूरोप के प्रमुख कौशल आधारित वीजा कार्यक्रमों में भी भारतीय पेशेवर बड़ी संख्या में शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक कंपनियां तकनीकी और पेशेवर दक्षता के मामले में भारतीय प्रतिभाओं पर लगातार भरोसा जता रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन ने भारतीय पेशेवरों की मांग को नई ऊंचाई दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर विकास जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित कार्यबल की कमी कई विकसित देशों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में भारत इस आवश्यकता को पूरा करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब केवल कम लागत के आधार पर भर्ती नहीं कर रही हैं। इसके बजाय वे विशेष कौशल और विशेषज्ञता रखने वाले कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए अधिक वेतन देने को तैयार हैं। कई देशों में वीजा धारक पेशेवरों की औसत आय स्थानीय कर्मचारियों के बराबर या उससे अधिक दर्ज की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में प्रतिभा की प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
खाड़ी देशों में भी भारतीय पेशेवरों की मजबूत मौजूदगी देखने को मिल रही है। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात भारतीयों के लिए सबसे बड़े रोजगार और व्यवसायिक केंद्रों में शामिल है। यहां विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है और उच्च कौशल वाले पेशेवरों की मांग लगातार बनी हुई है।
रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में भारतीय प्रतिभाओं की भर्ती में तेज वृद्धि का भी उल्लेख किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी बदलाव, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और वैश्विक कंपनियों की नई जरूरतों ने भारतीय पेशेवरों के लिए अवसरों के नए द्वार खोले हैं। इससे भारत की मानव संसाधन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिल रही है।
जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों ने भी कुशल विदेशी पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए नई नीतियां लागू की हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाने वालों में भारतीय नागरिकों की संख्या उल्लेखनीय बताई जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय प्रतिभाएं केवल पारंपरिक गंतव्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नए और उभरते वैश्विक बाजारों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एक नया रुझान भी देखने को मिल सकता है, जिसमें विदेशों में अनुभव हासिल करने वाले भारतीय पेशेवर देश में उपलब्ध हो रहे बेहतर अवसरों के कारण वापस लौट सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक अनुभव और उन्नत कौशल भारत की अर्थव्यवस्था, नवाचार क्षमता और तकनीकी विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।