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वैश्विक राहत संकेतों से भारतीय बाजार में रिकॉर्ड तेजी, बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने बढ़ाई निवेशकों की दौलत

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में शानदार प्रदर्शन किया। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया, जिसके चलते घरेलू बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी के परिणामस्वरूप निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब 10 लाख करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया।

कारोबार समाप्त होने पर प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों की सकारात्मक धारणा और वैश्विक संकेतों के समर्थन से बाजार ने पूरे सत्र के दौरान मजबूती बनाए रखी। बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उल्लेखनीय खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की व्यापक भागीदारी स्पष्ट हुई।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 462 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि निवेशकों ने वैश्विक परिस्थितियों में सुधार की उम्मीदों को सकारात्मक रूप से लिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को सबसे अधिक राहत इस बात से मिली कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की संभावना दिखाई दी।

कारोबारी सत्र के दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के शेयरों में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के शेयरों ने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में दो से तीन प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।

मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग के शेयरों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। आमतौर पर जोखिम वाले माने जाने वाले इन शेयरों में खरीदारी यह संकेत देती है कि बाजार सहभागियों का भरोसा केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक स्तर पर सकारात्मक धारणा बनी रही। इससे बाजार की मजबूती और अधिक व्यापक दिखाई दी।

विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरें रहीं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था। यदि किसी समझौते की दिशा में ठोस प्रगति होती है तो इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और निवेश माहौल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इसी उम्मीद का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिसे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए सकारात्मक माना जाता है। कम तेल कीमतें महंगाई के दबाव को घटाने, चालू खाते के संतुलन को बेहतर बनाने और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने में सहायक हो सकती हैं। यही कारण है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी को शेयर बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया।

हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि वैश्विक घटनाक्रमों में किसी भी प्रकार का बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है। फिर भी मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखाई दे रहा है और घरेलू आर्थिक संकेतक भी बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

दिनभर की तेज बढ़त ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होने की संभावना भारतीय बाजार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।

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