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महंगे होते स्मार्टफोन से बाजार में सुस्ती, मई में बिक्री 35 प्रतिशत तक घटी; लगातार बढ़ती कीमतों ने घटाई ग्राहकों की खरीदारी

नई दिल्ली । देश के स्मार्टफोन बाजार में मांग में नरमी के संकेत लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। मोबाइल फोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब बिक्री के आंकड़ों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मई महीने में मोबाइल फोन की बिक्री में सालाना आधार पर 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसे उद्योग जगत हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मान रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और उसके बोझ को उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित किए जाने के कारण खरीदारी की रफ्तार प्रभावित हुई है।

मोबाइल उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार पिछले कई महीनों से स्मार्टफोन कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि कर रही हैं। विशेष रूप से मेमरी चिप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की लागत बढ़ने के बाद कंपनियों ने नवंबर 2025 से कीमतों में नियमित संशोधन शुरू किया था। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता और खरीदारी के निर्णयों पर पड़ा है।

बाजार में फिलहाल ऑफलाइन बिक्री की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत बनी हुई है, जबकि शेष बिक्री ऑनलाइन माध्यमों से होती है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों ही चैनलों पर मांग कमजोर हुई है। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहक अब नए स्मार्टफोन खरीदने के फैसले को टाल रहे हैं या कम कीमत वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे प्रीमियम और मिड-रेंज दोनों श्रेणियों की बिक्री प्रभावित हुई है।

उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि मई महीने के दौरान स्मार्टफोन शिपमेंट में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट केवल बिक्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि कंपनियों की सप्लाई चेन और वितरण रणनीतियों पर भी असर डाल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून महीने में भी इसी प्रकार का दबाव बना रह सकता है, क्योंकि कई कंपनियों ने इस अवधि में भी कीमतों में वृद्धि जारी रखी है।

वर्ष 2026 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही थी, लेकिन दूसरी तिमाही में बाजार की स्थिति तेजी से बदली है। अब उद्योग को उम्मीद है कि दूसरी तिमाही के दौरान शिपमेंट में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हो सकती है। यह संकेत देता है कि मूल्य वृद्धि का असर अब व्यापक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी से मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में लगभग 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। यदि पिछले वर्ष की बढ़ोतरी को भी शामिल किया जाए तो कुछ मॉडलों में कुल मूल्य वृद्धि 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए नया स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है।

दूसरी ओर खुदरा विक्रेता भी दबाव महसूस कर रहे हैं। कई कंपनियां कीमतें बढ़ाने के साथ-साथ रिटेल मार्जिन में भी कटौती कर रही हैं। इससे कारोबारियों की लाभप्रदता प्रभावित हो रही है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले महीनों में मांग और कमजोर हो सकती है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार आगामी त्योहारी सीजन स्मार्टफोन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। यदि कंपनियां आकर्षक ऑफर, वित्तीय योजनाएं और प्रतिस्पर्धी मूल्य रणनीति अपनाती हैं तो मांग में कुछ सुधार संभव है। फिलहाल बढ़ती लागत और कमजोर उपभोक्ता मांग के बीच स्मार्टफोन उद्योग चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है।

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