महिला के अनुसार पूरा विवाद सोसाइटी के हैंडओवर, मेंटेनेंस फंड और कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर चल रहा है। उनका आरोप है कि सोसाइटी के फंड से करीब 15 लाख रुपए का गबन किया गया है और कुछ पदाधिकारी चार्ज हस्तांतरण से इसलिए बच रहे हैं ताकि कथित अनियमितताएं उजागर न हों। इसके अलावा नगर निगम की जमीन पर कथित अतिक्रमण और वहां धार्मिक संरचना स्थापित करने को लेकर भी विवाद बना हुआ है।
पीड़िता का कहना है कि 8 जून की रात सोसाइटी परिसर में विवाद के दौरान उनके बेटे कार्तिक शर्मा ने केवल गाली-गलौज का विरोध किया था। इसके बाद कुछ लोगों ने उस पर लाठियों, लात-घूंसों से हमला कर दिया। परिवार का आरोप है कि हमले में कार्तिक गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके गले से सोने की चेन भी गायब हो गई। घटना के बाद परिवार शिकायत लेकर कनाड़िया थाने पहुंचा, लेकिन रातभर इंतजार कराने के बाद रिपोर्ट दर्ज की गई।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि घटना में शामिल बताए जा रहे कनाड़िया थाने के आरक्षक नारायण जाट का नाम एफआईआर से हटा दिया गया। महिला का कहना है कि उन्होंने पुलिस को कई नाम बताए थे, लेकिन रिपोर्ट में केवल कुछ लोगों के नाम शामिल किए गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस विभाग से जुड़े होने के कारण आरक्षक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सुलोचना शर्मा ने थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वे कार्रवाई की मांग लेकर थाने पहुंचीं तो उन्हें केवल जांच का आश्वासन दिया गया। दूसरी ओर कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव का कहना है कि मामले में दर्ज शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और जिस आरक्षक पर आरोप लगाए गए हैं, उसकी भूमिका की भी जांच जारी है। पुलिस का दावा है कि महिला द्वारा बताए गए सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
उधर, आरक्षक नारायण जाट ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद थे, लेकिन किसी प्रकार की मारपीट में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी पहले सोसाइटी में सचिव पद पर थीं, जिसके कारण उनका नाम विवाद में घसीटा जा रहा है।
इस पूरे मामले ने सोसाइटी के रहवासियों के बीच तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। पीड़ित परिवार ने पुलिस कमिश्नर और नगर निगम आयुक्त से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।