MP Cabinet Decision : भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला राज्य कर्मचारियों के तबादलों को लेकर रहा। सरकार ने तबादला प्रक्रिया के लिए 24 घंटे का अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है। अब प्रदेश में विभागीय तबादले मंगलवार रात 12 बजे तक किए जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे उन विभागों को राहत मिलेगी, जहां प्रशासनिक कारणों से तबादलों की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है।
बता दें कि 20 मई को कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दी थी, जिसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 मई को आदेश जारी कर 15 जून तक तबादले करने के निर्देश दिए थे। अब संशोधित निर्णय के तहत विभागों को अंतिम अवसर प्रदान किया गया है।
इंदौर मेट्रो परियोजना की संशोधित लागत पर कैबिनेट की मुहर
बैठक में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के संशोधित लागत प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की गई। परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत लगभग 7,500 करोड़ रुपए तय की गई थी, लेकिन निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों, तकनीकी आवश्यकताओं और परियोजना विस्तार की जरूरतों को देखते हुए इसकी लागत बढ़ाकर 12,900 करोड़ रुपए कर दी गई है।
कैबिनेट ने इस संशोधित प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए परियोजना को जारी रखने का निर्णय लिया। इसके अलावा विभिन्न विभागों की लगभग 24 हजार करोड़ रुपए लागत वाली विकास योजनाओं को भी निरंतर जारी रखने की मंजूरी दी गई है, जिससे प्रदेश में अधोसंरचना और विकास कार्यों की गति बनी रहेगी।
स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मिली मंजूरी
मोहन कैबिनेट ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को भी मंजूरी दे दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में आधुनिक अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना है। सरकार परोपकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पतालों को विशेष प्रोत्साहन उपलब्ध कराएगी।
इन संस्थाओं को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, अत्याधुनिक मशीनों की खरीद और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस नीति से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों या दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
अस्पताल संचालित करने वाले ट्रस्टों को मिलेगी जमीन
स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अस्पताल संचालन में सक्षम ट्रस्टों और संस्थाओं को जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके लिए पांच कैबिनेट मंत्रियों की एक समिति गठित की जाएगी, जो जमीन आवंटन के मानदंड, पात्रता और अन्य प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देगी।
समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार आगे की नीति तय करेगी। इसके साथ ही अस्पतालों में उपयोग होने वाली मशीनों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद पर भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे निजी और सामाजिक संस्थाओं की स्वास्थ्य क्षेत्र में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और डॉक्टरों की उपलब्धता पर जोर
नई स्वास्थ्य नीति के तहत प्रदेश में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के नेटवर्क को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। सरकार का दावा है कि इससे मेडिकल शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में अधिक संख्या में एमबीबीएस तथा विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार किए जा सकेंगे। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों का बड़े शहरों की ओर पलायन कम होगा।
इस योजना को ‘मध्य प्रदेश परोपकारी संस्थाओं के लिए मेगा स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026’ नाम दिया गया है। कैबिनेट ने रीवा, देवास और गुना जिले के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान की है।
विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े निवेश का रोडमैप
कैबिनेट के फैसलों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए बड़े निवेश की दिशा में आगे बढ़ रही है। एक ओर इंदौर मेट्रो जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को गति देने की तैयारी है, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए नई नीतियां लागू की जा रही हैं। सरकार का दावा है कि इन निर्णयों से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और प्रदेश के समग्र विकास को नई रफ्तार मिलेगी।