दस्तावेज़ के अनुसार, जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू की जाएगी, जबकि रास्ते में मौजूद तकनीकी बाधाओं और बारूदी सुरंगों को हटाने में लगभग 30 दिन का समय लग सकता है।
इसके साथ ही MoU में यह भी कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य के प्रबंधन को लेकर ईरान ओमान के साथ बातचीत करेगा। इसमें फारस की खाड़ी से जुड़े अन्य देशों को भी शामिल किया जाएगा और यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून तथा तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों के तहत पूरी की जाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी गुजरती है। हाल ही में तनाव और संघर्ष की स्थिति के चलते इस मार्ग पर असर पड़ा था, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हुई।
MoU के 5वें बिंदु के मुताबिक, शुरुआती 60 दिनों तक टोल-फ्री व्यवस्था लागू रहने की बात कही गई है, जबकि आगे चलकर ईरान और ओमान मिलकर इसके स्थायी प्रबंधन और संभावित शुल्क व्यवस्था पर निर्णय ले सकते हैं।