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गायत्री जयंती 2026: सुख-समृद्धि और पुण्य फल के लिए 25 जून को जरूर करें ये 5 विशेष धार्मिक उपाय


नई दिल्ली।
सनातन धर्म में देवमाता, वेदमाता और विश्वमाता के रूप में पूजनीय मां गायत्री का अवतरण दिवस यानी गायत्री जयंती इस वर्ष 25 जून 2026, दिन गुरुवार को बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ही ममतामयी मां गायत्री का प्राकट्य हुआ था। ज्योतिषविदों और आध्यात्मिक गुरुओं का मानना है कि इस पावन तिथि पर यदि कुछ विशेष और बेहद सरल धार्मिक उपाय व नियम अपनाए जाएं, तो जातक के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है और उसे अक्षय पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

मध्य प्रदेश और देश के तमाम हिस्सों में इस दिन मां गायत्री की विशेष आराधना की जाती है, क्योंकि उन्हें बुद्धि, विवेक और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। गायत्री जयंती के शुभ अवसर पर सबसे पहला और प्रभावी उपाय तय संख्या में गायत्री मंत्र का शुद्ध उच्चारण के साथ जाप करना है। शांत और स्वच्छ वातावरण में बैठकर कमल गट्टे या तुलसी की माला से 108 या 1008 बार गायत्री मंत्र का जाप करने से न केवल मानसिक तनाव दूर होता है, बल्कि व्यक्ति की एकाग्रता और बौद्धिक क्षमता में भी अभूतपूर्व विकास होता है।

इस पावन दिवस पर घर या देवस्थान में गायत्री यज्ञ अथवा हवन का आयोजन करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इसके लिए शुद्ध देसी घी, जौ, काले तिल, कपूर और गुड़ जैसी मांगलिक सामग्रियों को मिलाकर हवन कुंड तैयार किया जाता है। यज्ञ की प्रत्येक आहुति के साथ गायत्री मंत्र का सामूहिक या व्यक्तिगत उच्चारण करने से घर-परिवार और आसपास के संपूर्ण वातावरण का शुद्धिकरण होता है। डॉक्टरों और पर्यावरणविदों का भी मानना है कि इस प्रकार के वैदिक हवन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक तरंगों का प्रवाह बढ़ता है।

चूंकि मां गायत्री को ज्ञान की सर्वोच्च देवी माना गया है, इसलिए इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार, गायत्री जयंती पर जरूरतमंद, निर्धन और अनाथ विद्यार्थियों को शिक्षा से संबंधित सामग्रियां जैसे पुस्तकें, कॉपियां और पेन दान करने से विद्या और करियर में अपार सफलता मिलती है। इसके साथ ही योग्य ब्राह्मणों को आदरपूर्वक अन्न, वस्त्र और जलपात्र का दान करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है और समाज में यश व कीर्ति की प्राप्ति होती है।

आध्यात्मिक चेतना और आत्मिक शुद्धि के लिए इस दिन व्रत रखने और पूर्णतः सात्त्विक दिनचर्या का पालन करने की सलाह दी जाती है। यदि स्वास्थ्य कारणों से निराहार या फलाहार व्रत रखना संभव न हो, तो व्यक्ति को लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर केवल सात्त्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, शाम के समय मां गायत्री की कपूर से आरती करने के बाद गायत्री चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से पारिवारिक कलह समाप्त होते हैं और घर के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम, तालमेल और विश्वास की भावना सुदृढ़ होती है।

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