जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे गुड़र गांव में स्थित प्राणसिंह प्रजापति के घर में अचानक जोरदार धमाका हुआ। उस समय घर में खाना बनाने का काम चल रहा था। धमाका इतना भीषण था कि मकान की छत और दीवारें पलभर में ढह गईं। विस्फोट के साथ आग की तेज लपटें उठीं और आसपास का क्षेत्र दहल उठा। धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिससे ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
हादसे के समय घर में मौजूद 4 वर्षीय जानवी प्रजापति मलबे के नीचे दब गई थी। ग्रामीणों और बचाव दल ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस दर्दनाक दृश्य ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। वहीं पड़ोस में रहने वाला 11 वर्षीय कल्ला आदिवासी भी उस समय घर के भीतर मौजूद था और विस्फोट में गंभीर रूप से झुलस गया था।
कल्ला को गंभीर हालत में पहले शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति नाजुक देखते हुए उसे तत्काल ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल रेफर कर दिया था। पिछले दो दिनों से उसका इलाज चल रहा था, लेकिन गुरुवार को उसने भी जिंदगी की जंग हार दी। उसके निधन की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
हादसे में रौशनी प्रजापति, प्राण सिंह प्रजापति और शिवा प्रजापति भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। तीनों का उपचार ग्वालियर में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रशासन और पुलिस की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि घर में रखे पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर में विस्फोट के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि अभी तक ब्लास्ट के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों की टीम विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही विस्फोट की असली वजह सामने आ सकेगी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा, पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया और स्थानीय विधायक प्रीतम लोधी ने मौके का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। वहीं प्रशासन ने हादसे की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
दो मासूमों की मौत ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। गांव के लोग अब भी उस भयावह धमाके को याद कर सहम जा रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने कुछ ही पलों में दो मासूम जिंदगियों को निगल लिया।