CM Contaminated Water : मध्य प्रदेश। शाजापुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान की गई पेयजल व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी मेहमानों को जो पानी उपलब्ध कराया गया था, वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं था। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। इस घटना ने सरकारी कार्यक्रमों में व्यवस्थाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
CMO ने उठाए पानी की गुणवत्ता पर सवाल
जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शाजापुर जिले के पोलायकलां स्थित सेमली धाम आश्रम पहुंचे थे। यहां उनके भोजन और पेयजल की विशेष व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारियों ने पानी से दुर्गंध आने और उसकी गुणवत्ता को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। अधिकारियों की शिकायत के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पानी के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए।
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जांच रिपोर्ट में सामने आई गंभीर गड़बड़ी
भोपाल स्थित स्टेट रिसर्च लेबोरेटरी द्वारा की गई जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार पानी में गंदलेपन यानी टर्बिडिटी का स्तर निर्धारित मानकों से करीब सात गुना अधिक पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का पानी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता। लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। रिपोर्ट ने कार्यक्रम में की गई व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
VIP मेहमानों को भी यही पानी कराया था उपलब्ध
जांच में यह भी सामने आया कि मुख्यमंत्री सहित कार्यक्रम में मौजूद अन्य वीआईपी मेहमानों को भी यही पानी उपलब्ध कराया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि किसी भी उच्चस्तरीय सरकारी कार्यक्रम में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। इसी वजह से मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।
अधिकारियों को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने 18 मई को संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि वीआईपी मेहमानों के लिए की गई पेयजल व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई गईं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि उपलब्ध कराया गया पानी पीने योग्य नहीं था। अधिकारियों से इस पूरे मामले में विस्तृत जवाब मांगा गया है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
नोटिस में इस लापरवाही को मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत गंभीर कदाचार की श्रेणी में माना गया है। साथ ही मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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प्रशासनिक जवाबदेही पर फिर उठे सवाल
यह मामला सरकारी कार्यक्रमों में गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो। फिलहाल सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।