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मेघालय में 530 मिमी बारिश से हालात गंभीर, असम समेत सात राज्यों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट


नई दिल्ली । पूर्वोत्तर भारत में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने असम और मेघालय समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार 28 जून तक क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इसके साथ ही कई स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।

आईएमडी के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश असम मेघालय नागालैंड मणिपुर मिजोरम और त्रिपुरा में आने वाले दिनों में लगातार बारिश का दौर बना रहेगा। 22 जून से 26 जून के बीच कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

रविवार को मेघालय और त्रिपुरा के कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में पिछले 24 घंटों के दौरान 102.5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के कारण शहर और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

वहीं मेघालय में बारिश ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। पूर्वी खासी हिल्स जिले के मावसिनराम में मात्र 24 घंटे के भीतर 530 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह मात्रा राजस्थान के कई शुष्क शहरों में छह महीने से अधिक समय में होने वाली कुल बारिश के बराबर है। इसके अलावा आरकेएम सोहरा में 470 मिमी और मावकिरवाट में 390 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा का असर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर भी दिखाई देने लगा है। शिलांग को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित डावकी से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क को नुकसान पहुंचने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है और स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार शेला में 100 मिमी विलियमनगर में 90 मिमी मावरिंगक्नेंग में 90 मिमी जोवाई में 80 मिमी बारापानी में 70 मिमी और रताछेरा में 70 मिमी बारिश दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में भी लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष 7 जून को पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में पहुंचा था जो सामान्य तिथि से दो दिन देर से था। हालांकि इसके बाद मानसून ने तेजी पकड़ी और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को पूरी तरह कवर कर लिया। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां मानसून के और मजबूत होने के लिए अनुकूल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक संरचना घने वन क्षेत्र और पहाड़ी भूभाग के कारण यहां मानसूनी गतिविधियां अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक स्थिर रहती हैं। यही वजह है कि अलनीनो जैसे वैश्विक मौसमीय प्रभावों का असर भी यहां अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों को अगले कुछ दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होगी क्योंकि भारी बारिश के चलते बाढ़ भूस्खलन और यातायात बाधित होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

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