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राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग


नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे के मामले में चल रही जांच के बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका मानना है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है।

गाजियाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था और भावनाओं का केंद्र है। ऐसे में यदि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं तो निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पदाधिकारियों को स्वयं आगे आकर नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि न्याय होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि न्याय होता हुआ दिखाई दे। यदि जांच के दौरान पदाधिकारी अपने पदों पर बने रहते हैं तो लोगों के मन में संदेह की स्थिति बनी रह सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करना चाहिए।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी अपील की कि ट्रस्ट के वर्तमान पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश कम होगी।

बिहार के चर्चित भरत तिवारी प्रकरण पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया से बाहर जाकर दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कानून के शासन वाले लोकतंत्र में न्यायिक प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है और किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो।

लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड पर दुख व्यक्त करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि केवल हादसे के बाद संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी सुरक्षा योजनाएं और निगरानी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए।

उन्होंने तेजी से हो रहे शहरी विकास पर भी चिंता जताई और कहा कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। यदि सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जाती है तो ऐसी त्रासदियां बार-बार सामने आती रहेंगी। उनके अनुसार प्रशासन, स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों को मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

राम मंदिर से जुड़े मामले पर दिए गए आचार्य प्रमोद कृष्णम के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर जांच की प्रगति और इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

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