भारत ने बैठक में प्रस्तुत राजनीतिक घोषणा पत्र में व्यक्त वैश्विक एकजुटता की भावना का समर्थन करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मौतों को कम करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हालांकि अभी भी असमानताओं, वित्तीय संसाधनों की कमी और नई वैश्विक चुनौतियों के कारण इस दिशा में हासिल उपलब्धियों पर खतरा बना हुआ है।
पी हरीश ने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने और उसके बाद भी इस क्षेत्र में प्रगति बनाए रखने के संकल्प के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने बताया कि भारत इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के माध्यम से व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। यह कार्यक्रम वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित योजना, सामुदायिक सहभागिता और एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं पर आधारित है।
भारत ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लगातार घरेलू निवेश और योजनाबद्ध प्रयासों की बदौलत देश में नए एचआईवी संक्रमण और एड्स से संबंधित मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही रोकथाम, जांच, उपचार, देखभाल और परामर्श सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी पहले की तुलना में काफी बढ़ी है।
बैठक में भारत ने देश-आधारित रणनीतियों और टिकाऊ वित्तपोषण के महत्व को भी रेखांकित किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि प्रत्येक देश को अपनी स्थानीय परिस्थितियों और महामारी की प्रकृति के अनुरूप रणनीति तैयार करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और पूर्वानुमेय वित्तीय सहायता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
भारत ने गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए अपनाई जा रही अपनी ट्रिपल एलिमिनेशन रणनीति का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत गर्भवती महिलाओं में एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस-बी की सार्वभौमिक जांच, समय पर उपचार और संक्रमित बच्चों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। भारत ने बच्चों में एड्स को समाप्त करने और संक्रमण के मातृ-शिशु प्रसार को रोकने के वैश्विक प्रयासों का भी समर्थन किया।
इसके अलावा भारत ने एचआईवी, तपेदिक, वायरल हेपेटाइटिस और अन्य सह-संक्रमणों के खिलाफ एकीकृत स्वास्थ्य रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत का मानना है कि ऐसी समेकित व्यवस्था स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के साथ-साथ संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी मदद करती है।
भारत ने बैठक में सस्ती दवाओं, जांच सुविधाओं और नई चिकित्सा तकनीकों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी प्रमुखता से उठाया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के टीआरआईपीएस समझौते के अंतर्गत उपलब्ध लचीले प्रावधानों का उपयोग विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि जीवनरक्षक दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों तक आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह पहल वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, समान स्वास्थ्य सेवाओं और एड्स मुक्त भविष्य के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह आने वाले वर्षों में भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर एचआईवी और एड्स के खिलाफ इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।