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बारिश में बाधित नहीं होगा सफर, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्रेनेज, निगरानी और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम पर गडकरी का जोर

नई दिल्ली । मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर जलभराव, भूस्खलन और यातायात अवरोध जैसी समस्याओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि बारिश के मौसम में सड़क नेटवर्क को सुरक्षित, सुचारु और बाधारहित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम समय रहते पूरे किए जाएं।

हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठकों में तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। इन क्षेत्रों में हजारों किलोमीटर लंबाई वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने मानसून से पहले विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समीक्षा के दौरान सड़कों की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की गति और सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर भी चर्चा की गई।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भारी बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा न हो। अक्सर देखा जाता है कि अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के कारण सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाने को प्राथमिकता दी गई है।

गडकरी ने पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में ढलानों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में मानसून और खराब मौसम के दौरान भूस्खलन की घटनाएं आम हैं, जिससे सड़क संपर्क बाधित हो सकता है। ऐसे में स्लोप स्टेबिलाइजेशन और सुरक्षा संरचनाओं को मजबूत बनाना आवश्यक माना गया है।

समीक्षा बैठकों में यह भी स्पष्ट किया गया कि मौसम संबंधी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित की जाए। इसके तहत ऐसे तंत्र तैयार किए जाएंगे जो किसी भी आपदा, सड़क अवरोध या संरचनात्मक समस्या की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि राहत और मरम्मत कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन पहले से उपलब्ध रखे जाएं ताकि यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो।

मंत्री ने परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल निर्माण कार्य पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सड़कें लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनी रहें। इसके लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों, उन्नत निर्माण पद्धतियों और मजबूत निगरानी तंत्र को अपनाने की आवश्यकता बताई गई।

गडकरी ने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को जवाबदेही बढ़ाने तथा नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि मजबूत निगरानी व्यवस्था से परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और निर्माण के दौरान संभावित कमियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा और रखरखाव की लागत भी कम की जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले और सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय विकास, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी गति देते हैं। ऐसे में मानसून से पहले व्यापक तैयारी करना और सड़क बुनियादी ढांचे को मौसम संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्रालय का मानना है कि इन कदमों से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क अधिक मजबूत, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक बन सकेगा।

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