जानकारी के अनुसार 21 जून को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी नाबालिग बेटी की तस्वीर का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है। वायरल किए गए फोटो और वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों का परिवार से कोई संबंध नहीं था लेकिन नाबालिग की तस्वीर जोड़कर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया।
मामले की जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। जांच में सामने आया कि मतदाता संबंधी सरकारी दस्तावेज में लगी नाबालिग की पासपोर्ट साइज फोटो बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी गई थी। इसके बाद यह फोटो कई लोगों के बीच साझा होती रही और अंततः गलत हाथों में पहुंचकर उसका दुरुपयोग किया गया।
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में तस्वीर साझा की और बाद में फोटो एडिटिंग के जरिए नाबालिग की तस्वीर को किसी अन्य युवती की तस्वीर के साथ जोड़कर आपत्तिजनक सामग्री तैयार की गई। इसके बाद उस सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर दिया गया जिससे पीड़िता और उसके परिवार को मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा।
जांच के दौरान पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री किन-किन प्लेटफॉर्म और लोगों तक पहुंचाई गई थी। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
कार्रवाई के तहत पुलिस ने आबिद पटेल मुजफ्फर पटेल और एहसान पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सरकारी दस्तावेज से फोटो साझा करने के मामले में बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की गई है। मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने कहा कि नाबालिग की पहचान और सम्मान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और जो भी व्यक्ति इस साजिश में शामिल पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और संवेदनशीलता का ध्यान रखें।