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स्वदेश दर्शन से प्रसाद योजना तक दिखा बड़ा असर, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार ने भारत को बनाया उभरती वैश्विक पर्यटन शक्ति


नई दिल्ली ।
पिछले एक दशक में भारत के पर्यटन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए निवेश और बुनियादी ढांचे के विस्तार ने देश की पर्यटन तस्वीर को नई दिशा दी है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पर्यटन स्थलों के विकास, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के उन्नयन तथा पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप देश के अनेक प्रमुख पर्यटन स्थलों की पहुंच, सुविधाओं और आकर्षण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

पर्यटन क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना ने इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस योजना के पहले चरण के अंतर्गत देशभर में विभिन्न थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से न केवल पर्यटन स्थलों की आधारभूत संरचना को मजबूत किया गया, बल्कि यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। सड़क संपर्क, पर्यटक सुविधाएं, सूचना केंद्र और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के विकास से पर्यटन अनुभव पहले की तुलना में अधिक सुगम और आकर्षक बना है।

पर्यटन विकास की इसी श्रृंखला में धार्मिक स्थलों के उन्नयन के लिए संचालित प्रसाद योजना भी महत्वपूर्ण साबित हुई है। इस योजना के तहत देश के प्रमुख तीर्थ और आस्था केंद्रों में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बुनियादी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अनेक परियोजनाएं लागू की गई हैं। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इससे नई गति मिली है। कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं के विकास से देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

राज्यों को पर्यटन विकास के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विशेष सहायता योजनाओं के माध्यम से भी बड़े निवेश किए गए हैं। विभिन्न राज्यों में स्वीकृत परियोजनाओं का लक्ष्य पर्यटन क्षमता वाले क्षेत्रों को विश्वस्तरीय गंतव्यों के रूप में विकसित करना है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद स्थानीय रोजगार, व्यवसाय और सेवा क्षेत्र को भी व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

पर्यटन क्षेत्र में हुए इन निवेशों का असर विदेशी और घरेलू पर्यटकों की बढ़ती संख्या के रूप में भी सामने आया है। बीते वर्षों में भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचा, डिजिटल सुविधाएं और आसान यात्रा प्रक्रियाएं इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में विकसित आधुनिक पर्यटन सुविधाओं ने भारत को वैश्विक पर्यटन बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।

सरकार द्वारा ई-वीजा सुविधा का विस्तार भी पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस व्यवस्था ने अनेक देशों के नागरिकों के लिए भारत की यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया है। वीजा प्रक्रिया में आई सहजता का सकारात्मक प्रभाव विदेशी पर्यटकों की संख्या पर भी देखा गया है। पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार से भारत की वैश्विक पहुंच और मजबूत हुई है।

पिछले दस वर्षों में देशभर के अनेक पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है और कई नए विकास प्रस्तावों पर भी काम चल रहा है। पर्यटन क्षेत्र में बढ़ते निवेश के कारण होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और सेवा उद्योगों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यटन केवल सांस्कृतिक और सामाजिक आदान-प्रदान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास का भी एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। लगातार विकसित हो रहे पर्यटन ढांचे और बढ़ते निवेश के चलते भारत वैश्विक पर्यटन अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन का एक प्रमुख स्तंभ बन सकता है।

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