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स्मार्ट टीवी हो गए हाईटेक लेकिन रिमोट अब भी पुरानी तकनीक पर आखिर ब्लूटूथ क्यों नहीं अपनाया गया

नई दिल्ली। आज लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में ब्लूटूथ तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। स्मार्टफोन स्मार्टवॉच वायरलेस ईयरबड्स और स्मार्ट टीवी तक ब्लूटूथ से लैस हैं। ऐसे में एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि जब टीवी खुद ब्लूटूथ सपोर्ट करता है तो उसका रिमोट अब भी इंफ्रारेड तकनीक पर क्यों चलता है। इसके पीछे कई तकनीकी और व्यावहारिक कारण हैं जो दशकों बाद भी इस तकनीक को प्रासंगिक बनाए हुए हैं।

इंफ्रारेड यानी आईआर तकनीक का इस्तेमाल 1970 और 1980 के दशक से टीवी रिमोट में किया जा रहा है। यह तकनीक बेहद सरल तरीके से काम करती है। रिमोट के अंदर मौजूद माइक्रोप्रोसेसर किसी बटन को दबाने पर एक डिजिटल कोड तैयार करता है। इसके बाद इंफ्रारेड एलईडी उस कोड को प्रकाश की तेज पल्स के रूप में टीवी की ओर भेजती है। टीवी में लगा सेंसर इस सिग्नल को पढ़कर उसे संबंधित कमांड में बदल देता है और उसी के अनुसार चैनल बदलना आवाज कम या ज्यादा करना तथा अन्य कार्य पूरे करता है।

हालांकि ब्लूटूथ तकनीक अधिक आधुनिक मानी जाती है लेकिन टीवी रिमोट के लिए इंफ्रारेड आज भी कई मामलों में बेहतर विकल्प साबित होती है। सबसे बड़ा कारण इसकी कम लागत है। इंफ्रारेड आधारित रिमोट बनाना काफी सस्ता पड़ता है जिससे कंपनियां उत्पाद की कुल कीमत को नियंत्रित रख पाती हैं।

दूसरी बड़ी वजह कम बिजली की खपत है। इंफ्रारेड रिमोट बहुत कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं इसलिए इनकी बैटरी कई महीनों तक आसानी से चल जाती है। वहीं ब्लूटूथ लगातार कनेक्शन बनाए रखने के कारण अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा खर्च करता है।

विश्वसनीयता भी एक अहम कारण है। इंफ्रारेड तकनीक सीधे डिवाइस से संपर्क करती है और इसमें पेयरिंग या नेटवर्क संबंधी परेशानियां नहीं होतीं। उपयोगकर्ता को केवल रिमोट टीवी की ओर करना होता है और कमांड तुरंत काम करने लगती है। इसके अलावा इंफ्रारेड तकनीक के उपयोग के लिए किसी अतिरिक्त लाइसेंस या वायरलेस प्रोटोकॉल से जुड़ी जटिलताओं का सामना भी नहीं करना पड़ता।

हालांकि ब्लूटूथ के अपने कई फायदे हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें टीवी की ओर रिमोट घुमाने की आवश्यकता नहीं होती। ब्लूटूथ की रेंज अधिक होने से दूसरे कमरे से भी डिवाइस को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा एक ही ब्लूटूथ रिमोट कई स्मार्ट डिवाइस के साथ भी काम कर सकता है।

यही वजह है कि अब प्रीमियम स्मार्ट टीवी में ब्लूटूथ रिमोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इनमें वॉयस कमांड गूगल असिस्टेंट एलेक्सा और एयर माउस जैसे फीचर भी मिलते हैं। हालांकि सामान्य और बजट टीवी में कम लागत और बेहतर बैटरी बैकअप के कारण इंफ्रारेड तकनीक अब भी सबसे लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट टीवी के साथ ब्लूटूथ रिमोट का इस्तेमाल बढ़ेगा लेकिन कम कीमत वाले मॉडलों में इंफ्रारेड तकनीक लंबे समय तक अपनी जगह बनाए रखेगी।आज लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में ब्लूटूथ तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। स्मार्टफोन स्मार्टवॉच वायरलेस ईयरबड्स और स्मार्ट टीवी तक ब्लूटूथ से लैस हैं। ऐसे में एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि जब टीवी खुद ब्लूटूथ सपोर्ट करता है तो उसका रिमोट अब भी इंफ्रारेड तकनीक पर क्यों चलता है। इसके पीछे कई तकनीकी और व्यावहारिक कारण हैं जो दशकों बाद भी इस तकनीक को प्रासंगिक बनाए हुए हैं।

इंफ्रारेड यानी आईआर तकनीक का इस्तेमाल 1970 और 1980 के दशक से टीवी रिमोट में किया जा रहा है। यह तकनीक बेहद सरल तरीके से काम करती है। रिमोट के अंदर मौजूद माइक्रोप्रोसेसर किसी बटन को दबाने पर एक डिजिटल कोड तैयार करता है। इसके बाद इंफ्रारेड एलईडी उस कोड को प्रकाश की तेज पल्स के रूप में टीवी की ओर भेजती है। टीवी में लगा सेंसर इस सिग्नल को पढ़कर उसे संबंधित कमांड में बदल देता है और उसी के अनुसार चैनल बदलना आवाज कम या ज्यादा करना तथा अन्य कार्य पूरे करता है।

हालांकि ब्लूटूथ तकनीक अधिक आधुनिक मानी जाती है लेकिन टीवी रिमोट के लिए इंफ्रारेड आज भी कई मामलों में बेहतर विकल्प साबित होती है। सबसे बड़ा कारण इसकी कम लागत है। इंफ्रारेड आधारित रिमोट बनाना काफी सस्ता पड़ता है जिससे कंपनियां उत्पाद की कुल कीमत को नियंत्रित रख पाती हैं।

दूसरी बड़ी वजह कम बिजली की खपत है। इंफ्रारेड रिमोट बहुत कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं इसलिए इनकी बैटरी कई महीनों तक आसानी से चल जाती है। वहीं ब्लूटूथ लगातार कनेक्शन बनाए रखने के कारण अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा खर्च करता है।

विश्वसनीयता भी एक अहम कारण है। इंफ्रारेड तकनीक सीधे डिवाइस से संपर्क करती है और इसमें पेयरिंग या नेटवर्क संबंधी परेशानियां नहीं होतीं। उपयोगकर्ता को केवल रिमोट टीवी की ओर करना होता है और कमांड तुरंत काम करने लगती है। इसके अलावा इंफ्रारेड तकनीक के उपयोग के लिए किसी अतिरिक्त लाइसेंस या वायरलेस प्रोटोकॉल से जुड़ी जटिलताओं का सामना भी नहीं करना पड़ता।

हालांकि ब्लूटूथ के अपने कई फायदे हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें टीवी की ओर रिमोट घुमाने की आवश्यकता नहीं होती। ब्लूटूथ की रेंज अधिक होने से दूसरे कमरे से भी डिवाइस को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा एक ही ब्लूटूथ रिमोट कई स्मार्ट डिवाइस के साथ भी काम कर सकता है।

यही वजह है कि अब प्रीमियम स्मार्ट टीवी में ब्लूटूथ रिमोट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इनमें वॉयस कमांड गूगल असिस्टेंट एलेक्सा और एयर माउस जैसे फीचर भी मिलते हैं। हालांकि सामान्य और बजट टीवी में कम लागत और बेहतर बैटरी बैकअप के कारण इंफ्रारेड तकनीक अब भी सबसे लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट टीवी के साथ ब्लूटूथ रिमोट का इस्तेमाल बढ़ेगा लेकिन कम कीमत वाले मॉडलों में इंफ्रारेड तकनीक लंबे समय तक अपनी जगह बनाए रखेगी।

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