छोटे हवाई अड्डों के लिए साबित होगी वरदान
इससे पहले टर्बोप्रॉप एटीआर विमान इस तकनीक का उपयोग कर चुके हैं, लेकिन जेट विमान में पहली बार इसका सफल इस्तेमाल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सैटेलाइट आधारित लैंडिंग प्रणाली उन छोटे हवाई अड्डों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जहां पारंपरिक और महंगे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) उपलब्ध नहीं हैं। इससे खराब मौसम में भी सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता बढ़ेगी।
भारत बना चुनिंदा देशों में शामिल
गगन प्रणाली का विकास इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से किया है। यह प्रणाली विमान संचालन के लिए लोकलाइजर परफॉर्मेंस विद वर्टिकल गाइडेंस (LPV) जैसी उन्नत लैंडिंग प्रक्रियाओं को आवश्यक सटीकता और कवरेज उपलब्ध कराती है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन प्रणाली मौजूद है।
सैटेलाइट नेविगेशन में नई उड़ान
उदयपुर के लिए संचालित इंडिगो की उड़ान ने वर्टिकल गाइडेंस के साथ लोकलाइजर परफॉर्मेंस अप्रोच (LPV) को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसे भारत में सैटेलाइट आधारित विमानन नेविगेशन प्रणाली के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इंडिगो कर रही तकनीक का विस्तार
इंडिगो ने वर्ष 2022 में अपने एटीआर विमानों में एलपीवी आधारित संचालन की शुरुआत की थी। अब एयरलाइन अपने जेट विमानों सहित पूरे बेड़े में इस स्वदेशी सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन सिस्टम की सुविधा का विस्तार कर रही है। इससे भविष्य में देश के अधिक हवाई अड्डों पर सुरक्षित और आधुनिक लैंडिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।