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2029 तक भारत के एयरपोर्ट सेक्टर में 4.2 लाख करोड़ रुपये निवेश की उम्मीद, हवाई यात्रा को मिलेगा बड़ा विस्तार

नई दिल्ली। भारत का विमानन क्षेत्र आने वाले वर्षों में बड़े विस्तार की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2029 तक देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश होने की संभावना है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा पहले से घोषित परियोजनाओं और आगामी वर्षों में शुरू होने वाली नई योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती घरेलू हवाई यात्रा और सरकार की बुनियादी ढांचा विकास नीति इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश पहले से जारी है, जबकि आने वाले वर्षों में नई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त पूंजी निवेश की उम्मीद है। इससे देश के विमानन नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य की बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

घरेलू हवाई यात्रा में लगातार बढ़ोतरी एयरपोर्ट सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है। रिकॉर्ड यात्री संख्या और एयरपोर्ट सेवाओं से होने वाली आय में वृद्धि के कारण ऑपरेटरों की आय में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आगामी वित्त वर्ष में भी घरेलू यात्री यातायात में लगातार वृद्धि बनी रहेगी, जिससे एयरपोर्ट कंपनियों के राजस्व और परिचालन क्षमता में और सुधार होगा।

देशभर में कई मौजूदा एयरपोर्टों के विस्तार के साथ-साथ नए टर्मिनलों का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है। इसके अलावा टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई सेवाओं का विस्तार भी प्राथमिकता पर है। नवी मुंबई और जेवर जैसे नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शुरू होने के बाद देश की विमानन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र अभी कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईंधन की बढ़ती कीमतें और कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर परिचालन संबंधी प्रतिबंधों के कारण विदेशी हवाई यात्रा की रफ्तार धीमी हुई है। चूंकि भारत की बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पश्चिम एशिया से जुड़ी हैं, इसलिए इस क्षेत्र की स्थिति का सीधा प्रभाव विमानन उद्योग पर पड़ रहा है। इसके बावजूद घरेलू बाजार की मजबूत मांग इन चुनौतियों की भरपाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में नए एयरपोर्ट पूरी क्षमता से संचालित होने और शीतकालीन उड़ानों के विस्तार के साथ यात्री संख्या में और तेजी आ सकती है। इससे एयरपोर्ट ऑपरेटरों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। नए टर्मिनलों के शुरू होने से रिटेल स्टोर, व्यावसायिक सेवाओं और एयरपोर्ट शुल्क से होने वाली कमाई में भी इजाफा होने की संभावना है।

रिपोर्ट में एयरपोर्ट सेक्टर का दीर्घकालिक परिदृश्य सकारात्मक बताया गया है। सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना, एयरपोर्ट विकास कार्यक्रमों और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति से इस क्षेत्र को अतिरिक्त गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत निवेश, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बढ़ती यात्री मांग के कारण भारत का एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।

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