यह विशेष अभियान 29 जून से 6 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया है। अभियान के माध्यम से देशभर के उत्पादकों को एक साझा डिजिटल मंच उपलब्ध कराया गया है, जहां वे अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने के साथ छोटे उत्पादकों की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी भी मजबूत होगी।
‘सहकार से समृद्धि’ स्टोर के जरिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों के उत्पाद एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए गए हैं। ग्राहक अब देश के अलग-अलग राज्यों में तैयार किए गए उत्पादों की ऑनलाइन खरीदारी कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य बिचौलियों पर निर्भरता कम करना और उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ना भी है।
देश में वर्तमान समय में 8.5 लाख से अधिक पंजीकृत सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 29 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं। ये संस्थाएं कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा, हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्योग और वित्तीय सेवाओं जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाओं और किसान समूहों को राष्ट्रीय ई-कॉमर्स बाजार तक पहुंच बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नया डिजिटल मंच इस अंतर को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
डिजीहाट का कहना है कि ओएनडीसी आधारित यह व्यवस्था सहकारी समितियों, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर देगी। इससे उनकी डिजिटल पहचान मजबूत होगी और उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। साथ ही छोटे और स्थानीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का बेहतर मंच मिलेगा।
अभियान के दौरान ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, किराना सामग्री, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं और घरेलू जरूरत का सामान प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष ऑफर, चयनित उत्पाद संग्रह और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के योगदान को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कॉमर्स के विस्तार के साथ सहकारी संस्थाओं को नए बाजार मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस तरह की पहल किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी गति प्रदान कर सकती है।