अमेरिका-रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन में संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत की गति तेज हुई है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर हाल ही में नई दिल्ली पहुंचे थे, जहां लंबी चर्चा के बाद समझौते के शेष बिंदुओं पर भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई। उनके अनुसार अधिकांश प्रावधानों पर सहमति बन चुकी है और अब अंतिम औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है।
राजदूत ने कहा कि इतने व्यापक और जटिल व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में समय लगना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े व्यापार समझौतों में कई वर्षों तक बातचीत चलना सामान्य बात है। इसी संदर्भ में उन्होंने यूरोपीय व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां ऐसे समझौतों को पूरा होने में दो दशक तक लग गए थे, जबकि भारत और अमेरिका अपेक्षाकृत कम समय में निर्णायक स्थिति तक पहुंच गए हैं।
सर्जियो गोर ने इस प्रस्तावित समझौते को दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी बताया। उनका कहना था कि यह किसी एक पक्ष के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि समझौते के लागू होने से निवेशकों और व्यापारिक संस्थानों को अधिक स्पष्टता और स्थिरता मिलेगी, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति प्राप्त होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के बीच लगातार उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं। भारत और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा कर लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की है। उनका मानना है कि इसी सक्रिय संवाद के कारण बातचीत अब अंतिम चरण तक पहुंच सकी है।
राजदूत ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले दो दशकों के दौरान आई उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो दोनों देशों के मजबूत आर्थिक सहयोग का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के बाद यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा।
सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दोनों देशों की साझा आर्थिक सोच और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। उनके अनुसार व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर सामने आने वाली नकारात्मक अटकलों को भी खारिज किया। उनका कहना था कि व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, निवेश और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह दोनों लोकतांत्रिक देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करेगा।