अविनाश मिश्रा से सबसे लंबी पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की, लेकिन सबसे अधिक समय आरोपी अविनाश मिश्रा से सवाल-जवाब में लगाया गया। बताया जा रहा है कि उसके पास से सबसे ज्यादा बरामदगी हुई थी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और चोरी के नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक बिना किसी संदेह के कैसे गायब होती रही और इसमें किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही।
पूछताछ में चोरी की कार्यप्रणाली का खुलासा
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान दान राशि की चोरी की पूरी कार्यप्रणाली पुलिस के सामने रखी। दावा किया गया कि दान राशि की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कुछ कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था। पुलिस ने यह जानने का प्रयास किया कि रकम किस समय निकाली जाती थी, उसे कैसे छिपाया जाता था और बाद में किस तरीके से मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था।
सूत्रों का यह भी दावा है कि पूछताछ में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। आरोपियों ने तौर पर कहा कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और जांच एजेंसियां आरोपियों के दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही हैं।
एक व्यक्ति रकम निकालता, बाकी बनाते थे घेरा
पूछताछ में सामने आए दावों के अनुसार, चोरी के दौरान एक व्यक्ति दान राशि निकालता था, जबकि बाकी आरोपी उसके चारों ओर इस तरह खड़े रहते थे कि बाहर से किसी को कोई संदेह न हो। इससे सीसीटीवी कैमरों और अन्य कर्मचारियों की नजर सीधे उस व्यक्ति तक नहीं पहुंचती थी।
सूत्रों के मुताबिक, निकाली गई रकम को तुरंत बाहर नहीं ले जाया जाता था, बल्कि पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपा दिया जाता था। बाद में अनुकूल अवसर मिलने पर उसे परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस दावे की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कर रही है।
कैमरों की निगरानी से बचने की थी पूरी जानकारी
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन और उनकी निगरानी के दायरे की पूरी जानकारी थी। इसी वजह से योजना ऐसे तैयार की जाती थी कि कैमरों की सीधी नजर से बचा जा सके। पुलिस अब कंट्रोल रूम की ड्यूटी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का भी मिलान कर रही है।
गणना कक्ष की चाबी को लेकर भी दावा
पूछताछ में आरोपियों ने तौर पर बताया कि गणना कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के पास होती थी। उनका दावा है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था। हालांकि, बैंक कर्मियों की किसी भूमिका की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दस्तावेजों, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पिछले सप्ताह हुई थीं गिरफ्तारियां
इस मामले में पुलिस ने पिछले सप्ताह मुकदमा दर्ज करने के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, गिनती इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव तथा रकम गिनने वाले अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में हुई ताजा पूछताछ को जांच का अहम चरण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार आरोपियों से पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से पूछताछ की गई।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने नोटिस का दिया जवाब
जांच के दौरान पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा से कुछ खातों की जानकारी मांगी थी, जिस पर बैंक ने जवाब सौंप दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाले दान तक सीमित है। बैंक के अनुसार, क्यूआर कोड के जरिए प्राप्त राशि सीधे बैंकिंग प्रणाली में दर्ज होती है, जबकि नकद चढ़ावे की गणना, पैकिंग और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बैंक की कोई भूमिका नहीं होती।
सूत्रों के अनुसार, राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त होता है, जबकि सबसे अधिक ऑनलाइन लेनदेन भारतीय स्टेट बैंक के जरिए होता है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के खातों की भी जांच
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में एक खाता है, जिसे कई वर्ष पहले दिल्ली से अयोध्या स्थानांतरित किया गया था। फिलहाल इस खाते में बहुत कम राशि है और लंबे समय से कोई उल्लेखनीय लेनदेन नहीं हुआ है।
इसी शाखा में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का भी बैंक खाता है। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए करीब 20 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया था। हालांकि, पुलिस इस जानकारी का सत्यापन कर रही है और अब तक जांच एजेंसियों ने इन खातों का चोरी से कोई सीधा संबंध होने की पुष्टि नहीं की है।
इन खातों की भी मांगी गई जानकारी
पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के खातों का विवरण भी मांगा था। बैंक ने अपने जवाब में बताया कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के नाम से खाते मौजूद हैं, जबकि सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला।
सूत्रों के अनुसार, मनीष यादव के खाते में फिलहाल करीब 1,400 रुपये जमा हैं और पिछले कुछ महीनों से उसमें कोई विशेष लेनदेन नहीं हुआ है। पुलिस अब अन्य बैंकों और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की रकम किसी अन्य माध्यम से तो नहीं पहुंचाई गई।