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प्रवासन नीति को मिली नई दिशा, 26 देशों से 28 साझेदारी समझौते कर भारत ने बढ़ाया वैश्विक सहयोग, जयशंकर ने बताया दीर्घकालिक विजन


नई दिल्ली ।
भारत ने वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और व्यवस्थित प्रवासन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 26 देशों के साथ 28 प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते किए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि इन समझौतों का उद्देश्य कानूनी और सुरक्षित आवागमन को बढ़ावा देना, कौशल आधारित वैश्विक अवसरों का विस्तार करना तथा अवैध प्रवासन और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई अन्य देशों के साथ इसी प्रकार के समझौतों पर बातचीत जारी है।

मानव संसाधन गतिशीलता से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में मानव संसाधनों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग में मानव गतिशीलता को एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानता है और इसी सोच के अनुरूप विभिन्न देशों के साथ साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

जयशंकर ने कहा कि प्रवासन एवं गतिशीलता संबंधी समझौते केवल लोगों के आवागमन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य प्रतिभा को अवसरों से जोड़ना और देशों की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराना भी है। उनके अनुसार यदि इन व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन किया जाए तो इससे मूल देश, गंतव्य देश, नियोक्ता, कामगार और स्थानीय समुदाय सभी को समान रूप से लाभ मिलता है।

विदेश मंत्री ने सुरक्षित, नियमित और कानूनी प्रवास की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए कहा कि इसके लिए द्विपक्षीय सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रवासन व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए देशों के बीच समन्वय बढ़ाना समय की जरूरत है। इसी उद्देश्य से भारत विभिन्न देशों के साथ दीर्घकालिक और संतुलित साझेदारी विकसित कर रहा है।

उन्होंने अवैध प्रवासन, धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों, शोषणकारी तौर-तरीकों और मानव तस्करी को वैश्विक स्तर की गंभीर चुनौती बताया। उनके अनुसार इस प्रकार की गतिविधियां न केवल कानूनी प्रवासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, बल्कि हजारों लोगों को गंभीर जोखिम में भी डाल देती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी देशों की साझा जिम्मेदारी और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।

जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना बदल रही है, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण और हरित प्रौद्योगिकी जैसी नई तकनीकें रोजगार और कौशल की मांग को तेजी से बदल रही हैं। ऐसे परिवर्तनों के बीच वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना और उनकी सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य, विनिर्माण, निर्माण, कृषि और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आज भी कुशल कार्यबल की मांग बनी हुई है। ऐसे में मानव संसाधन गतिशीलता केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सहयोग और साझा विकास का प्रभावी साधन बन सकती है। विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति प्रतिभा को वैश्विक अवसरों से जोड़ने, सुरक्षित प्रवासन को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक साझेदारी के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

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