यूरोप के अधिकांश देशों में दशकों तक गर्मियों का मौसम अपेक्षाकृत हल्का रहा। इसी कारण यहां के घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण ठंडी जलवायु को ध्यान में रखकर किया गया। मोटी दीवारें, सीमित वेंटिलेशन और गर्मी को भीतर रोकने वाली संरचनाएं पहले उपयोगी थीं, लेकिन बदलती जलवायु में यही डिज़ाइन अब बड़ी चुनौती बन गए हैं। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच घरों के भीतर तापमान लंबे समय तक बना रहता है, जिससे लोगों के लिए सामान्य जीवन भी कठिन हो जाता है।
यूरोप के करीब 80 प्रतिशत घरों में आज भी एयर कंडीशनर उपलब्ध नहीं हैं। इसके पीछे ऐतिहासिक जलवायु, ऊंची बिजली दरें, महंगा इंस्टॉलेशन, पुराने भवनों पर निर्माण संबंधी प्रतिबंध और पर्यावरण संरक्षण जैसी कई वजहें रही हैं। कई देशों में ऐतिहासिक इमारतों पर बाहरी एसी यूनिट लगाने की अनुमति भी नहीं मिलती, जिससे नई व्यवस्था स्थापित करना आसान नहीं होता।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में लगातार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने लोगों की सोच बदल दी है। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली और ब्रिटेन जैसे देशों में गर्मियों के दौरान तापमान कई बार 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे हालात में एयर कंडीशनर अब विलासिता नहीं बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकता के रूप में देखा जाने लगा है। इसी बदलाव ने पूरे यूरोप में एसी की मांग को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है।
बाजार में इस परिवर्तन का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। रिटेल स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां लगातार बढ़ती मांग का सामना कर रही हैं। कई स्थानों पर स्टॉक तेजी से समाप्त हो रहे हैं और पोर्टेबल एयर कंडीशनर, कूलिंग डिवाइस तथा पंखों की बिक्री में कई गुना वृद्धि दर्ज की जा रही है। निर्माताओं ने भी यूरोपीय बाजार के लिए विशेष मॉडल तैयार करने शुरू कर दिए हैं, ताकि बदलती जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा जलवायु रुझान जारी रहे तो आने वाले वर्षों में यूरोप में एयर कंडीशनर की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। हालांकि इसके साथ ऊर्जा खपत, बिजली आपूर्ति और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस भी तेज हो रही है। एक वर्ग का मानना है कि भीषण गर्मी से लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष ऊर्जा दक्ष भवनों और टिकाऊ कूलिंग तकनीकों को अधिक उपयुक्त समाधान मानता है।
बदलते मौसम ने स्पष्ट कर दिया है कि यूरोप अब केवल ठंडी जलवायु वाला महाद्वीप नहीं रह गया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों ने वहां रहने की परिस्थितियों को तेजी से बदला है और एयर कंडीशनर उद्योग को अभूतपूर्व विस्तार का अवसर दिया है। आने वाले वर्षों में कूलिंग तकनीक, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ निर्माण मॉडल यूरोप की नई शहरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की संभावना है।