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नवीन श्रम संहिताएं श्रमिकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाएंगी : श्रम मंत्री पटेल


भोपाल । श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नवीन श्रम संहिताओं के नियमों को बनाया जाए। नियमों की व्याख्या इस तरह हो कि आम श्रमिक भी आसानी से समझ सके। इन्हें अधिक सरल, व्यवहारिक और श्रमिक-केंद्रित बनाया जाए। यह बात पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विकास भवन में प्रदेश की नवीन श्रम संहिताओं के प्रस्तावित राज्य नियमों की समीक्षा करते हुए कही। मंत्री पटेल ने कहा कि नई श्रम संहिताओं का उद्देश्य श्रमिकों को अधिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ श्रमिक एवं नियोक्ता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

मंत्री पटेल ने श्रमिक कल्याण मंडलों एवं विभिन्न बोर्डों की संरचना में श्रमिक क्षेत्रों में कार्य करने वाले अनुभवी कार्यकर्ताओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने समूह बीमा योजना के नियम इस प्रकार तैयार करने पर बल दिया, जिससे असंगठित कर्मकारों को अधिकतम लाभ मिल सके। साथ ही संबल योजना का दायरा बढ़ाकर अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों को लाभान्वित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अंशदान में सरकार अथवा नियोक्ता की सहभागिता से योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक सहज एवं प्रभावी होगा। मंत्री पटेल ने प्रस्तावित नियमों में कुछ प्रावधानों को और अधिक स्पष्ट एवं संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। बीमा न्यायालय की कार्य प्रणाली, अर्द्धन्यायिक व्यवस्था तथा श्रमिकों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने के विभिन्न प्रावधानों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

राष्ट्रीय फ्लोर वेज तथा न्यूनतम मजदूरी निर्धारण के संबंध में मंत्री पटेल ने कहा कि कृषि श्रमिकों की कार्यकुशलता, बाजार की वास्तविक परिस्थितियों तथा विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में प्रचलित मजदूरी दरों का समुचित अध्ययन कर व्यावहारिक निर्णय लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी निर्धारण की प्रक्रिया अधिक यथार्थपरक बनाई जाए। श्रमजीवी पत्रकारों के संबंध में विशेष प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मंत्री पटेल ने कहा कि कोई भी निर्णय लेने से पहले पत्रकार संगठनों एवं उनके प्रतिनिधियों से संवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनके हितों के अनुरूप नियम तैयार किए जाएं।

मंत्री पटेल अन्तर्राज्यीय प्रवासी कर्मकारों के ऑनलाइन पंजीयन के लिए डिजिटल पोर्टल विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। मंत्री पटेल ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों का सटीक डेटाबेस तैयार होने से उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने पंचायत सचिवों एवं नगरीय निकायों के वार्ड स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी एवं जवाबदेही भी तय करने के निर्देश दिए। श्रमिकों की दुर्घटनाओं की त्वरित सूचना एवं सहायता के लिए सक्रिय पोर्टल तथा टोल-फ्री हेल्पलाइन विकसित करने के भी निर्देश दिए गए। ट्रांसजेंडर एवं दिव्यांगजनों के लिए कार्य स्थलों पर सुलभ स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं गरिमा से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट रूप से शामिल करने पर भी बल दिया गया। निरीक्षक प्रणाली के स्थान पर सुविधा प्रदाता (फैसिलिटेटर) आधारित व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में विभाग के सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने नवीन श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर 4 नई श्रम संहिताएं तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य सूचना आधारित पंजीयन व्यवस्था को बढ़ावा देना, नियोक्ता एवं कर्मचारी के बीच बेहतर संबंध स्थापित करना तथा उद्योगों को सुगम कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में तकनीक आधारित पंजीयन, संस्थानों को 24×7 संचालन की सुविधा, पृथक बीमा न्यायालय, अपील प्राधिकरण, राष्ट्रीय फ्लोर वेज, असंगठित, गिग एवं प्लेटफॉर्म कर्मकारों के सामाजिक सुरक्षा प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए एक वर्ष की सेवा पर ग्रेच्युटी की पात्रता तथा श्रमजीवी पत्रकारों एवं अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों से संबंधित नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। बैठक में विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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