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मैटरनिटी परिसर की घटना के बाद एक्शन देवास जिला अस्पताल ने बदली व्यवस्था अब प्रसव से पहले होगी विशेष निगरानी


देवास  देवास जिला अस्पताल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को उनकी संभावित प्रसव तिथि से सात दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया जाएगा ताकि प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। यह निर्णय हाल ही में मैटरनिटी परिसर में हुई एक प्रसव संबंधी घटना के बाद लिया गया है जिसमें महिला के अस्पताल देर से पहुंचने की बात सामने आई थी।

गुरुवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सरोजनी जेम्स बैक ने जिला अस्पताल की मैटरनिटी विंग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती गर्भवती महिलाओं से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद काफी देर से अस्पताल पहुंचती हैं जिससे मां और नवजात दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो जाता है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से सात दिन पहले अस्पताल में भर्ती कर उनकी नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जाएगी। इससे किसी भी जटिल स्थिति का समय रहते उपचार संभव हो सकेगा और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सिर्फ हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य गर्भवती महिलाओं के लिए भी नई पहल शुरू की गई है। अस्पताल प्रशासन अब संभावित प्रसव तिथि से चार दिन पहले गर्भवती महिलाओं से फोन पर संपर्क करेगा और उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचकर भर्ती होने के लिए प्रेरित करेगा। इसका उद्देश्य अंतिम समय की भागदौड़ और प्रसव के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं को कम करना है।

निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने अस्पताल के सोनोग्राफी केंद्र और चिकित्सकों के कक्ष का भी निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और सरकार द्वारा संचालित मातृ स्वास्थ्य योजनाओं का पूरा लाभ उठाने की सलाह भी दी।

अस्पताल प्रशासन का मानना है कि समय पर भर्ती और लगातार चिकित्सकीय निगरानी से मातृ मृत्यु और नवजात शिशुओं से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना और हर गर्भवती महिला को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

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