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दो देशों और पांच प्रमुख शहरों से गुजरेगा अली खामेनेई का अंतिम सफर, 9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार

नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की राजकीय अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू होगी और 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के साथ संपन्न होगी। अंतिम यात्रा का कार्यक्रम धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत ईरान और इराक के कई प्रमुख शिया धार्मिक केंद्रों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।

राजधानी तेहरान से अंतिम यात्रा की शुरुआत होगी, जहां आम लोगों के अंतिम दर्शन और राजकीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तेहरान को देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां से अंतिम यात्रा की शुरुआत को राष्ट्रीय सम्मान और नेतृत्व की निरंतरता का प्रतीक माना जा रहा है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से मजबूत रखी जाएगी।

तेहरान के बाद अंतिम यात्रा पवित्र शहर कोम पहुंचेगी, जिसे शिया धार्मिक शिक्षा और विद्वता का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में धर्मगुरु, छात्र और श्रद्धालु अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। कोम लंबे समय से शिया धार्मिक परंपरा और वैचारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, इसलिए इस शहर को अंतिम यात्रा के प्रमुख पड़ावों में शामिल किया गया है।

इसके बाद पार्थिव शरीर को इराक ले जाया जाएगा, जहां कर्बला और नजफ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होंगे। कर्बला शिया समुदाय के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है, जबकि नजफ धार्मिक शिक्षा और शिया परंपरा का महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। इन दोनों शहरों में अंतिम यात्रा का पहुंचना व्यापक शिया समुदाय के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। इन स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

अंतिम चरण में पार्थिव शरीर को ईरान के मशहद लाया जाएगा, जहां 9 जुलाई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मशहद अयातुल्लाह अली खामेनेई का जन्मस्थान भी है और शिया समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में इसकी विशेष पहचान है। इसी कारण अंतिम संस्कार के लिए इस शहर का चयन किया गया है।

अंतिम यात्रा को लेकर ईरान में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। देश-विदेश से बड़ी संख्या में धार्मिक प्रतिनिधियों, गणमान्य व्यक्तियों और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतिम यात्रा केवल एक राजकीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति, धार्मिक नेतृत्व और शिया समुदाय की एकजुटता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक होगी।

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